मीरजापुर | महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 के प्रभावी अनुपालन को लेकर मीरजापुर जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन के निर्देशानुसार मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) विशाल कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
📋 बैठक का उद्देश्य:
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सभी विभागों, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में “आंतरिक परिवार समिति” (Internal Complaints Committee) के गठन की प्रक्रिया को तीव्र करना था। अधिनियम के अनुसार, ऐसे हर संस्थान में जहां 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हों, वहाँ यह समिति गठित किया जाना अनिवार्य है।
⚠️ सख्त चेतावनी:
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि पूर्व की बैठकों में भी संबंधित विभागों को समिति गठन हेतु निर्देश दिए जा चुके हैं, परंतु कुछ विभाग अभी भी पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा:
“दो दिवस के भीतर समिति का गठन कर सूची जिला प्रोबेशन अधिकारी को मोबाइल नंबर सहित निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।”
🏢 कार्यालयों पर प्रदर्शित करें जानकारी:
-
समिति के गठन के उपरांत कार्यालय की दीवारों पर समिति अध्यक्ष और सदस्यों के नाम व मोबाइल नंबर पेंट करवाकर लिखवाना अनिवार्य होगा।
-
जिन कार्यालयों में 10 से कम कर्मचारी हैं, वहां पर जिला स्तर पर गठित समिति के सदस्यों की जानकारी प्रदर्शित की जानी चाहिए।
👩💼 बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी:
-
शक्ति त्रिपाठी – जिला प्रोबेशन अधिकारी
-
डाॅ. सी.एल. वर्मा – मुख्य चिकित्साधिकारी
-
सभी खण्ड विकास अधिकारी
-
दीक्षा पाण्डेय – तहसीलदार व जिला स्तरीय समिति सदस्य
-
नन्दिनी मिश्रा – सामाजिक कार्यकर्ता
-
सुनीता गुप्ता – अधिवक्ता
-
अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी व सदस्यगण
📜 कानूनी अनिवार्यता:
लैंगिक उत्पीड़न निवारण अधिनियम 2013 के अनुसार, किसी भी महिला कर्मचारी के उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जांच के लिए आंतरिक समिति का गठन करना संवैधानिक जिम्मेदारी है। इसकी अनदेखी करने पर संबंधित संस्था के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही भी की जा सकती है।