बलिया।
जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया में दीक्षोत्सव सप्ताह के अंतर्गत शैक्षिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता के संरक्षण और कुलसचिव एस.एल. पाल के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम का विषय था – “बहुभाषावाद के दौर में हिन्दी”।
हिन्दी में चिंतन और रोजगार की संभावनाएं
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. जैनेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि व्यक्ति का चिंतन अपनी भाषा में ही सर्वश्रेष्ठ रूप से अभिव्यक्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमें सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए और कम से कम एक से अधिक भाषाओं का ज्ञान अवश्य रखना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज के दौर में हिन्दी में रोजगार की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। मीडिया, सिनेमा, अनुवाद, साहित्य और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में हिन्दी का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
हिन्दी साहित्य की समृद्ध परंपरा
प्रो. पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी भाषा और साहित्य की परंपरा बहुत समृद्ध रही है। हमारे प्राचीन साहित्यकारों ने अनेक भाषाओं को सीखा और उनमें लेखन भी किया। इसी कारण हिन्दी साहित्य ने न केवल भारतीय संस्कृति बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है।
कार्यक्रम की झलकियाँ
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स्वागत भाषण – डॉ. प्रवीण नाथ यादव
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धन्यवाद ज्ञापन – डॉ. अभिषेक मिश्र
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संचालन – डॉ. संदीप यादव
कार्यक्रम में डॉ. प्रमोद शंकर पाण्डेय, डॉ. गुंजन कुमार, डॉ. शशिभूषण, डॉ. विजय शंकर पाण्डेय, डॉ. नीरज कुमार सिंह सहित अन्य प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।