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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के ऐतिहासिक सरस्वती भवन पुस्तकालय में पांच दिवसीय पांडुलिपि संरक्षण प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य उद्घाटन हुआ

 

अजय कुमार उपाध्याय वाराणसी

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय,वाराणसी के ऐतिहासिक सरस्वती भवन पुस्तकालय में आज अपरांह 3:00 बजे कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में इंफोसिस फाउंडेशन के आर्थिक सहयोग एवं संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान के सौजन्य से पांच दिवसीय पांडुलिपि संरक्षण प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य उद्घाटन हुआ ।

उस दौरान बतौर विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती मोनिका गर्ग ने अंतर्जाल के माध्यम से उपस्थित होकर विश्वविद्यालय के इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पांडुलिपियों के संरक्षण एवं संवर्धन से उसमें छिपे ज्ञान राशि से नयी पीढ़ी को लाभ मिलेगा साथ ही शास्त्रों का संरक्षण व संवर्धन भी होगा।उन्होने विश्वविद्यालय परिवार को इस कार्य के लिए साधुवाद देते हुये कहा कि इससे अपने विरासत को और समृद्धशाली बनाया जा सकेगा।
बतौर मुख्य अतिथि संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान नई दिल्ली के निदेशक एवं प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ चांद किरण सलूजा पांडुलिपियों के महत्व एवं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन के विशिष्ट ज्ञान राशि एवं इसमें छिपे ज्ञान विज्ञान के रहस्य को अगली पीढ़ी तक सरलता से पहुँचाने हेतु पांडुलिपियों के संरक्षण का महत्व है।पाण्डुलिपि को जानने वालों की कमी हो गयी है।संरक्षण से ही यह कार्य पूर्ण नहीं होता बल्कि इसका उपयोग हो इसके लिये जागरुकता उत्पन्न करने जरूरत है।
इस पांच दिवसीय कार्यशाला से शैक्षिक एवं व्यवहारिक की वृद्धि भी होगी।

उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर हरेराम त्रिपाठी ने संस्कृति एवं संस्कृत में संरक्षित ज्ञान विज्ञान को विश्व फलक पर लाने के लिए पांडुलिपियों के महत्व को प्रतिपादित करते हुये कहा कि यह संस्था 230 वर्षों की ऐतिहासिक एवं अतिप्राचीन है।यहां पर अनेकों संतों एवं आचार्यों ने अपने तप से इसे संरक्षित किया है जो कि आज भी संस्कृत शास्त्रों के ज्ञान राशि का पान सम्पूर्ण देश को करा रहा है।विरासत की रक्षा हर व्यक्ति का कर्तव्य और नैसर्गिक गुण है।आज पाण्डुलिपियों के संरक्षण के लिये इस कार्यशाला का आयोजन से पाण्डुलिपियों के संरक्षण साथ-साथ अपने विरासत की रक्षा का प्रयास होगा।हमारी विरासत गौरवमयी रही है।

कुलपति प्रो त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय से इस संदर्भ में एक वृहत्तर परियोजना के निर्माण पर बल दिया इसी क्रम में उन्होंने पांडुलिपि के रखरखाव संरक्षण एवं संवर्धन में संस्कृत समाज को आगे आने का संदेश भी दिया।

इस कार्यशाला में कुल 15 प्रतिभागियों की सहभागिता रहेगी जिसमें प्रशिक्षक के रूप में राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन नव दिल्ली के तीन प्रशिक्षक श्री अनिल द्विवेदी ,जितेंद्र कुमार, नितिन कुमार जी 5 दिनों तक चलने वाले इस कार्यशाला में पांडुलिपियों के संरक्षण साफ-सफाई कपड़ों के परिवर्तन एवं उनके रखरखाव की वैज्ञानिक तकनीकों से प्रशिक्षुओं को अवगत कराएंगे। कार्यक्रम का प्रारंभ वैदिक एवं लौकिक मंगलाचरण के अनन्तर कार्यक्रम के संयोजक प्रोफ़ेसर अमित कुमार शुक्ला जी के स्वागत भाषण से हुआ इस क्रम में सभी अतिथियों का अंगवस्त्रम एवं माल्यार्पण के द्वारा संयोजक महोदय ने स्वागत किया।
संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान के श्री लक्ष्मी नरसिंहम जी ने भी तकनीकी रूप से कार्यक्रम में सहयोग प्रदान करते हुए कार्यवृत्त एवं रूपरेखा से सभा को अवगत कराया। इस अवसर पर डॉ मधुसूदन मिश्र डॉ राजा पाठक सहित विश्वविद्यालय परिवार के कई गणमान्य आचार्य एवं पुस्तकालय विभाग के कर्मचारी एवं शोधार्थीगण उपस्थित थे।

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