टीम आईबीएन न्यूज़
राकेश की रिपोर्ट
गाजीपुर: लोक निर्माण विभाग के मुख्य परिसर में पिछले चार दिनों से जनपद जूनियर इंजीनियरों का धरना चल रहा है। धरने को प्रादेशिक कर्मचारी महासंघ के साथ-साथ डिप्लोमा इंजीनियर्स व जनपद के कई कर्मचारी संगठनों का समर्थन भी है लेकिन इस पूरे विवाद के मूल में एक तरफ सुभासपा के जखनियॉ विधायक बेदी राम है तो दूसरी तरफ भाजपा के नवनिर्वाचित जिलाध्यक्ष का नाम भी चर्चा में आ रहा है। पूरा खेल ठेके में कमीशनखोरी का है। जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान यहॅा तक कि लोक निर्माण विभाग मंे तैनात प्रथम, द्वितीय व तृतीय खण्ड के अधिशासी अभियन्ता भी तमाशबीन बने हुये है। मार्च के महीने में जिले के सबसे बड़े विभाग में चल रहे प्रदर्शन का रूख कड़ा होता जा रहा है।

बताया जाता है कि पिछले कई महीनों से जखनियॅा इलाके में बन रही लोक निर्माण विभाग से करोड़ों के लागत की सड़कों को मानक विहीन बनाये जाने का आरोप इलाकाई विधायक के साथ-साथ क्षेत्रीय जनता भी लगाती रहती है। इस इलाके की तमाम मानक विहिन सड़के व ठेकेदार की मनमानी की खबरे भी आये दिन मीडिया के सुर्खिया भी बनती है। बावजूद इसके आज तक विधायक के शिकायत के बाद भी सम्बन्धित सड़कों पर काम करने वाली कार्यदायी संस्थाओं के कर्ताधर्ता अपनी मनमानी रोकने के बजाय विवाद का नया मुद्दा गढ़कर समूचे विभाग व व्यवस्था को अपने हिसाब से चलाने का लगातार कुचक्र रच रहे है।
विधायक का आरोप है कि सड़क मानक विहिन है और इसकी जॉच के बाद ही काम होना चाहिये जबकि मौके पर तैनात जेई का आरोप है कि मेरे साथ मारपीट की गयी है। मारपीट करने वाला विधायक का बेटा है और मौजूदा समय में जौनपुर जिले के एक ब्लाक का ब्लाक प्रमुख भी है जबकि ठेकेदार के बारे में चर्चा है कि मौजूदा भाजपा जिलाध्यक्ष के सगे सम्बन्धी या रिश्तेदार है।
जखनियॉ इलाके की जर्जर सड़क को ठीक करने के लिये प्रदेश सरकार की ओर से खरबों रूपये का प्रस्ताव व प्रोजेक्ट टेण्डर के बाद शुरू किये गये है। इस विधानसभा को सरकार की ओर से मिली प्राथमिकता का मूल कारण इलाकाई महामण्डलेश्वर भवानीनन्दन यती का सत्ता व व्यवस्था में मजबूत दखल होना। जबकि जम्मू के एल0जी0 व जिले के पूर्व सांसद मनोज सिन्हा भी जखनियॉ को लेकर काफी उदार रहते है जिसके चलते इलाके में विकास की तमाम योजनायें तेजी से संचालित हो रही है।
इसी में कार्यदायी संस्थायें व जनप्रतिनिधियों के बीच करोड़ो के ठेके में मिलने वाले कमीशन को लेकर आये दिन संघर्ष पिछले डेढ़ सालों से चल रहा है। विधायक के पास सबूत है कि साइट पर बहस गरमागरम हुई लेकिन जूनियर इंजीनियर के पास किसी सबूत के बजाय मौके पर मौजूद विभाग के बेलदारो की गवाही जो किसी राहगीर , ग्रामीण या साइट पर काम कर रहे मजदूर की भी नही है। जिसके चलते समूचे मामले में जिला प्रशासन व जिलाधिकारी मूकदर्शक बने है। दोनो ताकतवर दिग्गजों के बीच पिस रहे जिले में तैनात जूनियर इंजीनियरों का तमाशा देख रहे है।