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गाजीपुर में शराब की कम्पोजिट दुकानों के बाहर खुलेआम शराबखोरी

गाजीपुर: माडल शॉप की तर्ज पर चल रही शराब की कम्पोजिट दुकानों से आमजन त्रस्त, पुलिस की चुप्पी से नाराज़गी बढ़ी

राकेश की रिपोर्ट | टीम IBN न्यूज

गाजीपुर

उत्तर प्रदेश सरकार की शराब नीति के तहत आबकारी विभाग द्वारा लॉटरी के माध्यम से आबंटित की गई देशी, विदेशी शराब और बीयर की दुकानों का स्वरूप अब बदलता जा रहा है। गाजीपुर जनपद में दो दर्जन से अधिक कम्पोजिट शराब दुकानें खुलेआम मॉडल शॉप की तर्ज पर संचालित हो रही हैं, जिनमें बीयर और अंग्रेजी शराब एक ही काउंटर पर बेची जा रही है।

इन दुकानों के सामने चखने की दुकानें, कुर्सी-मेज की व्यवस्था और दिन भर बैठकर शराब पीने वालों की भीड़ आम बात हो गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग, तहसील और जिला मुख्यालय से लेकर रिहायशी मुहल्लों तक, इन दुकानों की बढ़ती संख्या ने सभ्य समाज के लोगों को हतप्रभ और सहमा हुआ बना दिया है।

पुलिस मौन, ठेकेदार बेलगाम

स्थानीय नागरिकों ने जब इन दुकानों की खुलेआम शराबखोरी और हंगामे की शिकायत पुलिस प्रशासन से की, तो प्रारंभ में कुछ कार्रवाई हुई। लेकिन जल्द ही पुलिस ने “समझौते” के बाद अपनी निगरानी हटाई और ठेकेदारों को खुली छूट मिल गई।

जंगीपुर मंडी परिषद में तो स्थिति और भी शर्मनाक तब हो गई जब रात्रि गश्त पर निकले क्षेत्राधिकारी (CO) शहर ने स्वयं रात 8 बजे चल रही शराब पार्टी देखी। हालांकि उनकी उपस्थिति देखकर शराब पीने वाले भाग निकले, लेकिन ठेकेदार ने तत्काल थानेदार से बात करके व्यवस्था जारी रखने की “अनुमति” प्राप्त कर ली, और अब भी वहीं हालात बने हुए हैं।

कहां-कहां खुली हैं ऐसी दुकानें?

गाजीपुर जनपद में जिन प्रमुख स्थानों पर ये कम्पोजिट शराब दुकानें संचालित हो रही हैं, उनमें शामिल हैं:

  • शहर व लंका, भुतहिया टाड़, जंगीपुर, मरदह, भड़सर, नंदगंज, सैदपुर, जखनियां, हंसराजपुर, भदौरा, धरम्मरपुर

  • कठवामोड़, बाराचवर, सिधागर घाट, घाट स्टेशन, औड़िहार, सादात नगर, सादात बस स्टैंड, दुल्लहपुर

  • नायकडीह, रूहीपुर, सलामतपुर, कादीपुर, भावरकोल, उसिया, खानपुर आदि।

इन सभी जगहों पर शराब की दुकानों के आगे शराबियों की भीड़, शोरगुल, आपत्तिजनक हरकतें, और सड़क किनारे पीने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

नया कारोबार, नया संकट

नवीन लॉटरी व्यवस्था में कई ऐसे लोगों को दुकानें आवंटित हुईं जिन्हें शराब व्यवसाय का अनुभव नहीं था, लेकिन वे लाभ के उद्देश्य से कूद पड़े। उन्हें लगा कि सरकारी दुकान है तो न कोई परेशानी, न ही कोई रोक-टोक। यही सोच अब जनसुरक्षा और सामाजिक शांति के लिए खतरा बनती जा रही है।

स्थानीय जनता में आक्रोश

शहर के बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, और महिला संगठनों ने इन दुकानों पर रोक लगाने या उचित नियंत्रण व्यवस्था लागू करने की मांग की है। कई इलाकों में महिलाओं ने प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है।

प्रशासन क्या कर रहा है?

अभी तक जिले के पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। स्थिति यह है कि कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ रही हैं और अधिकारी “दबाव” में हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

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