टीम IBN न्यूज़ / ब्यूरो रिपोर्ट
गाजीपुर: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा और अवैध अस्पतालों के घिनौने खेल का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। शहर के गर्विता अस्पताल में एक प्रसूता और मासूम की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल संचालिका ने पहले हजारों रुपये वसूले और जब मरीज की हालत बिगड़ी तो उसे रेफर कर दिया गया, जिससे मां-बच्चे दोनों की जान चली गई।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, बिरनो थाना क्षेत्र के रामदलपुर रूहीपुर निवासी सुजाता यादव को गर्विता अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो दिन तक ऑपरेशन और इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूलने के बाद तीसरे दिन मरीज की हालत खराब हुई।
अस्पताल की संचालिका कृतिका जायसवाल ने हाथ खड़े करते हुए मरीज को मऊ रेफर कर दिया और एंबुलेंस बुलवाकर खुद पीछा छुड़ा लिया। रास्ते में ही प्रसूता और मासूम की मौत हो गई।
मृतका के भाई रामकेश यादव का आरोप है कि—
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मरीज का 8 ग्राम ब्लड होते हुए भी अतिरिक्त खून निकाला गया।
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ऑपरेशन के दौरान संभवतः गलत नस काट दी गई।
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लापरवाही और वसूली की वजह से प्रसूता और मासूम की जान चली गई।
अवैध अस्पतालों का गोरखधंधा
गाजीपुर शहर और आसपास के इलाकों में दर्जनों ऐसे अस्पताल संचालित हो रहे हैं जिनकी रजिस्ट्री तक संदिग्ध है।
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गोराबाजार, सिकंदरपुर, महुआबाग, ददरीघाट, रौजा, मिश्रबाजार, नबाबगंज समेत कई क्षेत्रों में प्राइवेट अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं।
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रौजा इलाके में आधा दर्जन से ज्यादा प्राइवेट अस्पताल एक-दूसरे के पास संचालित हैं।
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कई अस्पताल बिना जांच-पड़ताल और पंजीकरण के गरीब मरीजों से मोटी रकम वसूल रहे हैं।
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मौत के मामलों को दबाने के लिए अस्पताल संचालक दलालों और कुछ यूट्यूब चैनलों की आड़ लेते हैं।
प्रशासन पर उठे सवाल
प्राइवेट अस्पतालों के इस नेटवर्क पर स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी और ढिलाई भी सवाल खड़े कर रही है। जहां शासन-प्रशासन मुफ्त और बेहतर इलाज का दावा करता है, वहीं जिले के भीतर गरीबों की जान के साथ खिलवाड़ जारी है।
परिजनों की अपील
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे इस मामले को जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों के समक्ष ले जाएंगे और न्याय की मांग करेंगे। ग्रामीणों ने भी मांग की है कि ऐसे अवैध और लापरवाह अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।