रिपोर्ट ब्यूरो
गोरखपुर। आजादी का अमृत पर्व समारोह के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी की भूमिका विषय पर व्याख्यान हुआ। कुलपति माननीय प्रो राजेश सिंह की अध्यक्षता एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुए इस आयोजन के मुख्य वक्ता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय प्रभाग के निदेशक प्रोफेसर जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी संपूर्ण देश को एकता के सूत्र में बांधने वाली भाषा है ।यह वह भाषा है जिसने स्वराज्य की प्राप्ति में अमूल्य योगदान दिया था। आजादी के समय में यह राष्ट्रभाषा थी तो आज यह यह संवैधानिक स्तर पर राजभाषा है किंतु यह हमारी स्वाधीन चेतना की भाषा है। हिंदी का चरित्र लोकतांत्रिक है। ऐसे में आवश्यक है कि अमृत पर्व में अपने स्वाधीनता आंदोलन के नायको के भाषिक योगदान का स्मरण किया जाए ।नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं को, मातृ भाषाओं को जो महत्व दिया गया है वह अमृत पर्व में महान उपलब्धि है। आवश्यकता है कि शिक्षा के केंद्र में नई शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय भाषाएं ,मातृभाषा ज्ञान विज्ञान का माध्यम बने ।घर की भाषा एवं देश की भाषा विरोधी नहीं एक दूसरे के पूरक है ।
सह अध्यक्ष के रूप में अंग्रेजी विभाग के आचार्य श्री अजय शुक्ला ने कहा कि अच्छा नागरिक वही है जिसे 3 एम के प्रति लगाव हो -माता-पिता, मातृभूमि और मातृभाषा । एक अच्छे नागरिक के लिए मातृभाषा इसलिए आवश्यक है कि वह संस्कार पैदा करती है ।संस्कार हमें मातृभाषा से मिलते हैं ।अंग्रेजी ज्ञान, अध्ययन की भाषा है, किंतु मातृभाषा में हमारा सांस्कृतिक गौरव छुपा हुआ है । हमें अपने सांस्कृतिक गौरव की पहचान के लिए मातृभाषा की ओर उन्मुख होना होगा । प्रारंभ में संयोजकीय वक्तव्य आजादी के अमृत महोत्सव के संयोजक डॉ दीपक प्रकाश त्यागी ने दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस का अवसर भारतीय भाषाओं को याद करने का अवसर है ।हिंदी दिवस के अवसर पर हमें भारतीय भाषाओं के बीच में एक सूत्रता और परस्पर समन्वय के बिंदु खोजने होंगे ।संचालन डॉ अभिषेक शुक्ल ने किया तथा तकनीकी सहयोग डॉ गौरी शंकर चौहान का रहा ।इस वेबीनार में लगभग 78 विद्यार्थी ,शोधार्थी उपस्थित रहे।