फरीदाबाद: सेक्टर-12 हुडा मैदान में चल रही श्री श्रद्धा रामलीला कमेटी की रामलीला ने चौथे दिन श्रद्धालुओं और दर्शकों को भावुक कर दिया। मंचन के दौरान सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र की कथा प्रस्तुत की गई, जो सत्य और धर्म की अनुपम मिसाल है।
सत्य की राह पर बलिदान की गाथा
कथा में दिखाया गया कि राजा हरिश्चन्द्र ने अपने वचन और सत्य की रक्षा के लिए राजपाट, परिवार और अपना सब कुछ त्याग दिया।
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उन्होंने पत्नी, पुत्र और खुद का भी बलिदान कर दिया लेकिन सत्य से समझौता नहीं किया।
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यही रघुकुल की परंपरा है जिसमें वचन और मर्यादा सर्वोपरि मानी जाती है।
इस मंचन ने दर्शकों को गहराई तक छू लिया और वातावरण भावुक कर दिया।
कलाकारों का शानदार अभिनय
इस विशेष प्रसंग को जीवंत बनाने में कलाकारों का योगदान उल्लेखनीय रहा।
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राजा हरिश्चन्द्र की भूमिका अनिल चावला ने निभाई, जिन्होंने अपने भावनात्मक अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।
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रानी तारा का किरदार योगंधा वशिष्ठ ने निभाया।
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रोहतास की भूमिका ऋषिव हंस ने की।
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महर्षि विश्वामित्र का दमदार अभिनय राजेश खुराना ने प्रस्तुत किया।
अन्य कलाकारों में:
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नक्षत्र – नेत्रपाल शर्मा
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इन्द्र – राजकुमार ढींगरा
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सेठ – विजय कुमार कांटा
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सेठानी – हिमानी शर्मा
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कलुआ – मनोज नरूला
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जोगन – आसावरी वशिष्ठ
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मंत्री – जितेंद्र अरोड़ा
सभी ने अपनी प्रभावशाली अदाकारी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संवाद और मंच सज्जा ने बढ़ाई शोभा
रामलीला के दौरान संवाद, भाव-भंगिमाएं और मंच सज्जा ने पूरे वातावरण को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।
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हरिश्चन्द्र और तारा के बीच संवाद ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।
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विश्वामित्र और हरिश्चन्द्र के बीच के प्रसंग ने सत्य और धर्म की महत्ता को और गहराई से प्रस्तुत किया।
दर्शकों का भावुक होना
जब राजा हरिश्चन्द्र ने सत्य के लिए सब कुछ त्याग दिया, तब पूरे मैदान में सन्नाटा पसर गया और कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं। मंच पर प्रस्तुत यह गाथा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही बल्कि दर्शकों के हृदय में भी गहरी छाप छोड़ गई।
संस्कृति और परंपरा से जुड़ाव
श्री श्रद्धा रामलीला कमेटी द्वारा किए जा रहे लगातार मंचन न केवल धार्मिक आस्था को प्रबल कर रहे हैं, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का भी कार्य कर रहे हैं।
फरीदाबाद के लोगों का कहना है कि इस प्रकार की लीलाएं बच्चों और युवाओं को सत्य, धर्म और त्याग के आदर्शों से जोड़ने का माध्यम बनती हैं।