सलेमपुर (देवरिया)। भारतीय संस्कृति की जड़ें गांवों की मिट्टी से जुड़ी हैं, जहां परंपराएं, रीति-रिवाज और आस्था जनजीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसी ही एक लोक आस्था का उदाहरण देखने को मिला बभनौली पांडेय गांव में, जहां डीह बाबा और जाखिनी माता का विवाह उत्सव पूरे विधि-विधान, बैंड-बाजे और वैदिक मंत्रों के बीच संपन्न हुआ।
गांव में निकली भव्य बारात, महिलाओं ने गाए मंगल गीत
विवाहोत्सव की शुरुआत डीह बाबा की भव्य बारात से हुई, जिसमें हाथी, घोड़े, बैंड-बाजे के साथ सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। महिलाएं पारंपरिक मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं। पूरे गांव में बारात की परिक्रमा कर अंत में डीह बाबा की प्रतिष्ठित प्रतिमा के पास सभी मांगलिक कार्य पूरे किए गए।
वैदिक मंत्रोच्चार और लोकाचार के साथ संपन्न हुई रस्में
विवाह की सभी रस्में स्थानीय आचार्यगणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराई गईं। वहीं, गांव की महिलाओं ने लोक परंपरा के अनुरूप गीतों और रीति-रिवाजों का पालन करते हुए विवाह को पूर्ण कराया।
ग्रामीणों ने किया नृत्य, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम
इस अवसर पर ग्रामीण पुरुषों और महिलाओं ने भक्ति भाव से नृत्य कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस विवाहोत्सव ने एक धार्मिक आयोजन के साथ-साथ ग्राम्य संस्कृति और सामाजिक समरसता को भी प्रकट किया।
हजारों की संख्या में उमड़े श्रद्धालु
इस अवसर पर हजारों ग्रामीणों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। कार्यक्रम में मुंद्रिका पासवान, रामचन्द्र पासवान, चंद्रभूषण पांडेय, डॉ. धर्मेंद्र पांडेय, अमरजीत यादव, मनोज पांडेय अंटू, गुड्डू पांडेय, उदय कुशवाहा, अनिरुद्ध कुशवाहा, आशीष पांडेय, गोल्डेन पांडेय, काशीनाथ पांडेय, सहित सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इसके अलावा पंडित राजेश्वर तिवारी, नवनाथ यादव, अभिमन्यु पांडेय, केशनाथ कुशवाहा, और अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस आयोजन में भाग लिया और इसे सफल बनाया।
डीह बाबा और जाखिनी माता: ग्राम्य संस्कृति का जीवंत प्रतीक
सनातन संस्कृति में डीह बाबा को गांव के रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है। वहीं, जाखिनी माता को शक्ति का रूप माना जाता है। इन दोनों की सांकेतिक विवाह परंपरा ग्राम्य जीवन में सुरक्षा, समृद्धि और सामाजिक समरसता का प्रतीक मानी जाती है।