फरीदाबाद से बी.आर. मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद: बाल विवाह समाज में एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो न केवल बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा डालती है, बल्कि समाज के आर्थिक और शैक्षिक विकास को भी पीछे धकेलती है। इसे समाप्त करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत हैं।
इसी क्रम में आज अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) साहिल गुप्ता के मार्गदर्शन में दो प्रमुख सरकारी स्कूलों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
📍 कहां-कहां हुआ कार्यक्रम?
-
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बालिका), सिही बल्लभगढ़
-
सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-7, फरीदाबाद
🎯 उद्देश्य क्या था?
इन जागरूकता कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बाल विवाह की कुप्रथा और उसके दुष्परिणामों से अवगत कराना था, ताकि वे स्वयं इसके खिलाफ आवाज़ उठाएं और समाज में बदलाव लाएं।
🗣️ संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी हेमा कौशिक का वक्तव्य
हेमा कौशिक ने बताया कि, “बाल विवाह बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। हमें एकजुट होकर इस सामाजिक बुराई को खत्म करना होगा।” उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की ओर से बच्चों की शिक्षा, भविष्य सुरक्षा, और अधिकारों की रक्षा के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
🧠 विद्यार्थियों ने ली शपथ
कार्यक्रम की शुरुआत शपथ ग्रहण समारोह से हुई, जहां विद्यार्थियों ने यह संकल्प लिया कि:
“हम स्वयं बाल विवाह नहीं करेंगे और न ही किसी को इसकी अनुमति देंगे।”
यह एक सकारात्मक पहल थी, जिसने विद्यार्थियों को सामाजिक उत्तरदायित्व का एहसास कराया।
👩🏫 भागीदारी
इस जागरूकता अभियान में स्कूल प्रशासन, शिक्षकगण, स्थानीय प्रशासन के अधिकारी और छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
⚠️ बाल विवाह के दुष्परिणाम
-
शिक्षा में बाधा
-
मानसिक और शारीरिक विकास में रुकावट
-
स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
-
सामाजिक असमानता की वृद्धि
-
रोजगार के अवसरों में कमी
🤝 समाधान क्या है?
-
बच्चों को उचित शिक्षा और जागरूकता देना
-
समुदाय और परिवार का सहयोग
-
कानूनी जागरूकता फैलाना
-
सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
✊ निष्कर्ष
जब तक समाज स्वयं बाल विवाह के खिलाफ जागरूक और सक्रिय नहीं होगा, तब तक इसे पूरी तरह समाप्त करना असंभव है। इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम न केवल बच्चों को बल्कि पूरे समुदाय को शिक्षित करने का कार्य कर रहे हैं।