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भटनी/देवरिया – बहादुर यादव महाविद्यालय में बही गंगा-जमुनी तहज़ीब की धारा

Ibn24x7news रिपोर्ट कलीमल्लाह भटनी देवरिया
“ग़रीबी बच्चों के रुख से शरारत छीन लेती है” के साथ मुशायरा उरूज़ पर पहुंचा–
बहादुर यादव महाविद्यालय में बही गंगा-जमुनी तहज़ीब की धारा-
स्थानीय कवि “रूमी निज़ामी” को किया सम्मानित-
भटनी, दिन शुक्रवार को भटनी के बहादुर यादव कॉलेज में मुशायरे के दौरान गंगा जमुनी तहजीब की धारा ख़ूब बही जिसमें श्रोताओं की वाह वाह ने चार चांद लगा दिया।इस मुशायरे व कवि सम्मेलन की शुरुआत के पहले मुख्य अतिथि और यहाँ आये शायरों का माल्यार्पण हुआ और उन्हें स्मृति चिन्ह व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
मुशायरे की शुरुआत नौजवान शायर तलहा ज़िया के कलाम से हुई जिन्होंने दर्शकों से खूब वाह वाही लूटी।हास्य कवि राजेश ने जब पढ़ा कि ”मेरे प्यार की डाइट की तुम गरम मसाला हो”तो सोए दर्शक जग से गये।वरिष्ठ शायर ने नदिमुल्लाह ने माहौल को और उरूज़ पर पहुँचा दिया जब उन्होंने पढा की ‘ग़रीबी बच्चों के चेहरे से शरारत छीन लेती है’ और ‘ वृद्ध लोगों के लिये कहा कि ‘मैं फटा नोट ही लेकिन कभी न कभी बाज़ार में चल जाऊंगा’ तो श्रोता झूम उठे।किसी शायर ने एकता पर कहा कि ‘हमें मस्जिदों की ज़रूरत भी है सुबह हमारी आज़ान से होती है’ तो खूब वह वही मिली।जहाँ प्रसिद्ध कवि आर विप्लवी ने अपनी कविताओं से वाहवाही बटोरी तो दूसरी तरफ महेश अश्क ने भी लोगों को तालियाँ बजाने को मजबूर कर दिया।कई कवियत्रियों ने भी अपनी कविताएं पेश की और दर्शकों का मन मोह लिया।
मुशायरे व कवि सम्मेलन की शुरुआत के पहले महाविद्यालय महाविद्यालय के संस्थापक कैप्टन जयराम यादव व मुख्य अथिति गोरखपुर विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के रज़ीउर्ररहमान ने सरस्वती प्रितमा पर माला पहना कर की और फिर दूर दूर से आये व स्थानीय कवियों को प्रबन्धक अजय यादव व प्राचार्य डॉ विनोद यादव सम्मानित किया और शाल ओढ़ाकर स्मृति चिन्ह प्रदान किया।उन्होंने स्थानीय कवि रूमी निज़ामी को भी सम्मानित किया और उनके बारे में संचालक बताया कि कभी उच्च स्तर के क्रिकेटर रहे रूमी निज़ामी आज हमारे बीच एक कवि के रूप में हैं जिनकी कविताएं हम अक्सर अख़बार में पढ़ते रहते हैं।इस दौरान चीफ गेस्ट अजीजुर्रहमान साहब ने कहा कि उर्दू अदब की ज़बान है और जब कोई उर्दू को बोलता है तो अदब के करीब होता है।उन्होंने कहा कि सभी मुस्लिम और हिन्द के पुरखे साझा हैं मतलब यह कि समाज पूर्वजों की सन्तति है।इसी ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ को भारत मे नया नाम ‘गंगा जमुनी तहजीब’ के रूप में मिला।उन्होंने कहा कि ‘तू एक था मेरे अशआर में हज़ार हुआ,इसी से कितने चराग़ जल उठे’।
इस मुशायरे की तैयारी कई दिनों से चल रही थी जिसके लिए कॉलेज के प्रबन्धक ने जीतोड़ मेहनत की थी जिनका पूरा सहयोग कॉलेज स्टाफ के रूप में शिवशंकर मौर्य,राहुल यादव,उर्दू विभाग के मो.मंज़र,डॉ अनूप कुमार,डॉ राम मनोहर यादव,राजेश कुशवाहा, रामजी यादव ने किया।पूरे कार्यक्रम का संचालन वसीम अज़हर साहब ने अपनी सुरीली व दबंग आवाज किया और उन्होंने गंगा जमुनी तहजीब पर प्रकाश भी डाला।

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