मीरजापुर। लोक आस्था और परंपरा का अनोखा संगम माने जाने वाला तीन दिवसीय ऐतिहासिक बेचूबीर मेला शुभारंभ हो गया है, जो दो नवम्बर की भोर में मानरी बजने के बाद संपन्न होगा। यह मेला अहरौरा थाना क्षेत्र से लगभग 12 किलोमीटर दूरी पर स्थित बेचूबीर धाम में आयोजित होता है।
यह मेला सामान्य धार्मिक आयोजनों से अलग और अनूठा माना जाता है, क्योंकि यहाँ कथित रूप से भूत-प्रेत व बाधाओं से पीड़ित लोग आते हैं, और पहाड़ी पर स्थित बाबा की चौरी के दर्शन के बाद कई लोग झूमते, नाचते और विलक्षण अवस्था में दिखाई देते हैं।
🕉 350 वर्षों से चली आ रही परंपरा
मान्यता के अनुसार, बेचूबीर बाबा भगवान शिव के परम भक्त थे और वे बरही जंगल में भैंस चराते थे। एक दिन शेर के हमले में तीन दिन संघर्ष करने के बाद उनकी मृत्यु हो गई।
उनकी मृत्यु के बाद ग्रामीणों ने उनकी स्मृति में चौरा स्थापित किया, जो आगे चलकर विशाल लोक-धार्मिक स्थली के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार—
बेचूबीर बाबा के दर्शन और पूजा से भूत-प्रेत बाधा, डायन दोष, और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
इसी आस्था के कारण बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पूर्वांचल के हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
🙏 बरही मां के दरबार में भी उमड़ती है आस्था
बेचूबीर बाबा के दर्शन के बाद भक्त पास स्थित बरही माता मंदिर भी जाते हैं। कथा है कि—
जब बरही माता को बेचूबीर बाबा की मृत्यु की सूचना मिली, तो वे एक किलोमीटर दूर स्थित स्थान पर सती हो गईं।
इसी कारण दोनों स्थानों को एक ही धार्मिक शक्ति केंद्र माना जाता है।
🚿 भक्सी नदी में स्नान की प्राचीन मान्यता
श्रद्धालुओं का मानना है कि—
भक्सी नदी में स्नान कर भीगे कपड़े वहीं छोड़कर बाबा के दर्शन करने से मनोकामना पूर्ण होती है।
🛡 प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
भीड़ को नियंत्रित और व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है।
थाना प्रभारी निरीक्षक सदानंद सिंह ने बताया—
“मेले को दो सेक्टरों में बांटा गया है।
13 थानों के पुलिस अधिकारी व सब-इंस्पेक्टर मेले की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
ड्रोन कैमरा, पैदल गश्त और बैरिकेडिंग के माध्यम से सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।”