फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद: बल्लभगढ़ स्थित ऊंचा गांव मदरसा मखजनुल उलूम में आज एक अहम बैठक रखी गई। इस मौके पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद जिला अध्यक्ष मौलाना जमालुद्दीन ने मस्जिदों के इमामों और कमेटी के जिम्मेदारों से अनुरोध किया कि ईद-उल-फित्र की नमाज केवल ईदगाह या मस्जिदों में ही अदा की जाए।
रास्तों व पार्कों और गैर जरूरी जगहों पर नमाज पढ़ने से बचें,ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि ईद-उल-फित्र खुशी,अमन,भाईचारे और मोहब्बत का त्योहार है। इस्लाम ने हर मामले में आसानी दी है।
अगर नमाजियों की संख्या ज्यादा हो जाए तो बाकी लोग दूसरे इमाम के पीछे अपनी नमाज अदा कर सकते हैं।मौलाना जमालुद्दीन ने कहा कि ईद का असली मकसद गरीब,जरूरतमंद और बेसहारा लोगों की मदद करना भी है। फित्रा देने से ऐसे लोगों को काफी सहारा मिलता है,इसलिए हर किसी को इसे जरूर अदा करना चाहिए।
बैठक में ईद की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की गई,जिसमें पार्किंग,पानी,लाइट,सफाई,चटाई और मौसम को देखते हुए बारिश से बचाव के इंतजाम पर बात हुई,ताकि लोग आराम और सुकून के साथ नमाज अदा कर सकें।
गांव और आसपास के इलाकों से आने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए जामा मस्जिद ऊंचा गांव में ईद की नमाज का समय सुबह 8:45 बजे तय किया गया। मस्जिद कमेटी के प्रधान शेर खान मलिक ने सभी सदस्यों के साथ मिलकर जिम्मेदारियां बांटीं।
पार्किंग की जिम्मेदारी नरसिंह अधाना,कन्हैया लाल और उमरी खान को दी गई,जबकि लाइट,पानी और सफाई की जिम्मेदारी आस मोहम्मद कुरैशी,बाबू खान सिद्दीकी शौकत सेफी,इस्लाम,शौकिन मलिक और अन्य लोगों को सौंपी गई।
मौलाना जमालुद्दीन ने कमेटी के इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि आपसी सलाह से किया गया काम हमेशा बेहतर होता है।उन्होंने इलाके के हिंदू भाइयों का भी धन्यवाद किया,जो हर मौके पर भाईचारा और सौहार्द बनाए रखते हैं और जरूरत पड़ने पर हर तरह से सहयोग करते हैं।
फरीदाबाद जिला सूफी संतों की नगरी के रूप में जाना जाता है और ऊंचा गांव इसकी एक मिसाल है,जहां लोग मिल-जुलकर हर त्योहार मनाते हैं।