मुदस्सिर हुसैन IBN NEWS, मवई (अयोध्या)
अयोध्या जिले के रुदौली तहसील अंतर्गत ग्राम नेवाजपुर की रहने वाली एक दलित महिला शिवांशी पत्नी बलराम इन दिनों न्याय के लिए दर-दर भटक रही है। महिला ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र के हल्का लेखपाल ने भूमि पैमाईश के नाम पर उससे ₹20,000 की घूस पहले ही ले ली, और बाद में दबंगों द्वारा किए जा रहे अवैध कब्जे को हटवाने के एवज में ₹50,000 की मांग की गई।
मामले की पृष्ठभूमि
पीड़िता शिवांशी का कहना है कि उसने एक महीने से ज्यादा समय से तहसील रुदौली और मवई थाने के चक्कर काटे हैं, लेकिन न तो प्रशासन उसकी सुनवाई कर रहा है और न ही पुलिस कोई ठोस कार्रवाई कर रही है। उसने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को भी शिकायती पत्र सौंपा है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
लेखपाल पर गंभीर आरोप
महिला ने शिकायत में कहा है कि हल्का लेखपाल ने पहले भूमि पैमाईश के नाम पर ₹20,000 लिए और जब उसने दबंगों के अवैध निर्माण को रुकवाने की मांग की, तो ₹50,000 की घूस मांगी गई। जब महिला ने असमर्थता जताई तो लेखपाल ने कथित तौर पर पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से गाटा संख्या वाली भूमि पर दबंगों को निर्माण कार्य करने की अनुमति दे दी।
SDM और लेखपाल की प्रतिक्रिया
जब इस पूरे प्रकरण पर IBN NEWS संवाददाता ने एसडीएम रुदौली से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं जब हल्का लेखपाल से संपर्क किया गया तो उन्होंने मामले की जानकारी से इनकार कर दिया। जबकि महिला का कहना है कि लेखपाल ने मौके पर जाकर SDM साहब के मिसलेनियस ऑर्डर पर भूमि की पैमाईश की थी और रिपोर्ट भेज दी थी।
प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल
यह मामला स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि किसी दलित महिला को न्याय के लिए महीनों तक दर-दर भटकना पड़े और उसके शिकायतों पर कार्यवाही न हो, तो प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाज़मी है।
अब आगे क्या?
अब सवाल यह है कि क्या पीड़ित महिला को न्याय मिलेगा या नहीं? क्या प्रशासन अपने ही कर्मचारियों पर कार्रवाई करेगा? या फिर यह मामला भी अन्य हजारों मामलों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा?