फरीदाबाद से बी.आर. मुराद की रिपोर्ट:- फरीदाबाद: महात्मा सावित्रीबाई फूले सेवा समिति, फरीदाबाद के कार्यकर्ताओं ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे को लेकर जिलाधीश (DC) कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य था – महात्मा ज्योतिबा फूले और सावित्रीबाई फूले के जीवन पर आधारित फिल्म “फूले” की रिलीज पर लगी रोक का विरोध करना और इस संबंध में महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपना।
कार्यकर्ताओं ने साफ शब्दों में अपनी मांग रखी कि इस फिल्म को बिना किसी कटौती और बाधा के जल्द रिलीज किया जाए, ताकि समाज के सभी वर्गों को फूले दंपत्ति के प्रेरणादायक जीवन और उनके कार्यों के बारे में सही जानकारी मिल सके।
महापुरुषों के योगदान को जानना देश के नागरिकों का अधिकार
संस्था के संस्थापक सुरेन्द्र सैनी ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फूले और सावित्रीबाई फूले ने 18वीं सदी में जो सामाजिक क्रांति की थी, वह आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। ज्योतिबा फूले मात्र 13 वर्ष की आयु में समाज सुधार के कार्यों में लग गए थे और उन्होंने स्त्री शिक्षा को लेकर जो आंदोलन खड़ा किया, वह ऐतिहासिक है। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए स्कूल खोलकर शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।
सैनी ने यह भी कहा कि “फूले” फिल्म सिर्फ एक मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ऐसी फिल्म को रोकना, समाज के जागरण में बाधा उत्पन्न करने जैसा है।
डीसी कार्यालय के बाहर दिया गया ज्ञापन
महात्मा सावित्रीबाई फूले सेवा समिति के कार्यकर्ताओं ने डीसी कार्यालय पर एकत्र होकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया और डीसी साहब के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान सभी कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में फिल्म की रिलीज की मांग की।
ज्ञापन सौंपते समय उपस्थित प्रमुख सदस्य:
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सुरेन्द्र सैनी (संस्थापक)
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लक्ष्मण शर्मा
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राकेश सैनी
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रविन्द्र मौर्य
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नरेन्द्र कुमार
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आकाश
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विशाल
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संजीव कुशवाहा
निष्कर्ष
फिल्म “फूले” को लेकर उठी यह आवाज न केवल एक फिल्म की रिलीज की मांग है, बल्कि यह समाज सुधारकों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास भी है। महात्मा फूले और सावित्रीबाई फूले जैसे महापुरुषों की जीवनगाथा को समझना और अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।