फरीदाबाद से बी.आर. मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद: गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सराय ख्वाजा, फरीदाबाद में प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा, स्टाफ सदस्य और जूनियर रेडक्रॉस (JRC) के सदस्यों ने ईको-फ्रेंडली होली मनाने का आह्वान किया और जल को व्यर्थ न करने की अपील की।
प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने बताया कि होली वसंत ऋतु का एक महत्वपूर्ण भारतीय पर्व है, जिसे फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह पर्व रंगों और उल्लास का प्रतीक है और पूरे भारत में बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इसके अलावा, यह त्योहार उन देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है, जहां हिंदू समुदाय निवास करता है।
होली पर्व का महत्व
होली पारंपरिक रूप से दो दिन तक मनाई जाती है:
- पहला दिन – होलिका दहन: इस दिन पवित्र अग्नि जलाई जाती है, जो असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है।
- दूसरा दिन – धुलेंडी (जिसे धुरखेल या धूलिवंदन भी कहा जाता है): इस दिन लोग रंग, अबीर, गुलाल आदि से होली खेलते हैं। ढोल-नगाड़ों की धुन पर होली गीत गाए जाते हैं, घर-घर जाकर रंग लगाने की परंपरा निभाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता भुलाकर आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देते हैं।
सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने कहा कि होली भाईचारे, प्रेम और सद्भाव का संदेश देती है। यह पर्व कटुता मिटाकर आपसी संबंधों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने सभी से फूलों, हर्बल रंगों और गुलाल से होली खेलने की अपील की ताकि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हो सके और जल की बर्बादी रोकी जा सके।
उन्होंने कहा,
“हम सभी को होली के अवसर पर भेदभाव भूलकर प्रेम, समर्पण और आपसी सद्भाव से मिलकर इसे मनाना चाहिए।”
प्राचार्य ने सभी अध्यापकों और स्टाफ सदस्यों को होली की शुभकामनाएं दीं और ईको-फ्रेंडली होली मनाने व जल बचाने का संकल्प लेने का अनुरोध किया।