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एमबीबीएस कर रहे कुछ छात्रों को जबरन फेल करने के आरोपों की जांच शुरू

 

ब्यूरो चीफ मुकेश मिश्र

अंबेडकरनगर – महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर टांडा में 18 छात्रों को जानबूझकर फेल कर देने के आरोपों की जांच कॉलेज प्रशासन ने शुरू कर दी है। इसके लिए बाकायदा दो सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी गई। हालांकि प्रारंभिक जांच में छात्रों के आरोपों को सही नहीं पाया गया। कहा गया कि प्रायोगिक परीक्षा में फेल हुए कई छात्र लिखित परीक्षा में भी फेल थे। इस बीच विद्यालय प्रशासन छात्रों के इन आरोपों पर शुक्रवार कोई स्पष्ट जवाब देने की स्थिति में नहीं था कि लिखित परीक्षा में ग्रेस अंकों के साथ पास हुए कई छात्रों को प्रायोगिक परीक्षा में बेहतर अंक कैसे प्राप्त हो गए।महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर के कई छात्रों ने गत दिवस यह आरोप लगाकर हड़कंप मचा दिया था कि एमबीबीएस थर्ड प्रोफेशनल पार्ट टू के 18 छात्रों को जानबूझकर प्रायोगिक परीक्षा में फेल कर दिया गया।

अधिकारियों तथा मीडिया को भेजी गई गोपनीय शिकायत में छात्रों व अभिभावकों ने बताया कि कॉलेज में वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश में लगे एक एचओडी की तरफ से यह गड़बड़ी दबाव डलवाकर की गई है। शिकायत में कहा गया था कि कई मेधावी छात्र जिनका लिखित परीक्षा में प्रदर्शन अच्छा था, उन्हें प्रयोगात्मक परीक्षा में जानबूझकर फेल कर दिया गया।उधर एचओडी व कुछ अन्य लोगों के करीबी कई ऐसे छात्र जो लिखित परीक्षा में किसी तरह ग्रेस मार्क पाकर पास हुए थे, उन्हें प्रयोगात्मक परीक्षा में आश्चर्यजनक ढंग से काफी बेहतर अंक हासिल हो गए। छात्रों के इन आरोपों की मीडिया ने अपने शुक्रवार के अंक में प्रकाशित किया था। इसे मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने प्राथमिकता के साथ संज्ञान में लिया। प्राचार्य डॉ. संदीप कौशिक ने अमर उजाला में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए तत्काल परीक्षा अधीक्षक व प्रभारी अधिकारी छात्र सेल को पूरे प्रकरण की जांच सौंप दी। उनसे कहा गया कि पूरे तथ्यों का अवलोकन करते हुए देखा जाए कि छात्रों के साथ किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई है या उन्हें गलतफहमी है।

 

इस बीच छात्रों के आरोपों का अखबारों में प्रकाशित खबर के चलते शुक्रवार को पूरे दिन कॉलेज प्रशासन में हड़कंप का माहौल रहा।कई दौर की अलग-अलग बैठकें दिन में कई चक्र चलीं। बाद में प्राचार्य ने शुक्रवार शाम कहा कि फिलहाल अब तक जो भी तथ्य सामने आए हैं, उसके अनुसार छात्रों के आरोपों में सच्चाई नहीं है। तमाम तरह की छानबीन अभी कराई गई है। इसमें पाया गया कि प्रयोगात्मक परीक्षा में जो छात्र फेल हैं, उनमें से ज्यादातर किसी न किसी लिखित परीक्षा में भी फेल हैं। ऐसे में यह कहना कि जो छात्र लिखित परीक्षा में पास हैं, उन्हें जानबूझकर फेल किया गया, यह सिर्फ काल्पनिक है। प्राचार्य का कहना था कि जिस भी छात्र को यह लगता है कि उसके साथ गलत हुआ है तो वह व्यक्तिगत तौर पर सीधे मुझसे संपर्क कर सकता है। उसकी शंका का निराकरण सुनिश्चित कराया जाएगा। सभी छात्र मेरे परिवार के सदस्य हैं। उनके साथ किसी भी प्रकार के उत्पीड़न व अन्याय की स्थिति नहीं होने दी जाएगी। यदि कोई भी ऐसा करता पाया गया तो उस पर समुचित निर्णय भी होगा।उधर कॉलेज प्रशासन के इन तमाम दावों के बीच शुक्रवार को यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई कि क्या ऐसे तमाम छात्रों को जानबूझकर तो प्रायोगिक परीक्षा में बेहतर अंक नहीं दे दिए गए, जो लिखित परीक्षा में ग्रेस अंक के साथ पास हुए हों। कॉलेज प्रशासन ने शुक्रवार को इस बिंदु पर कहा कि अभी इस बारे में छानबीन पूरी नहीं हो पाई है। जांच चल रही है। जल्द ही पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी।

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