रिपोर्ट ब्यूरो
गोरखपुर। मनरेगा योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय अंतर्मुखी करण क्षमता निर्माण के लिए बाबा गंभीर नाथ प्रेक्षागृह सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन जिलाधिकारी विजय किरन आनंद की अध्यक्षता में आयोजित किया गया ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए गीला कचरा से खाद बनाने गोबर से किसी भी गड्ढे में बायोगैस प्लास्टी को संग्रहण कर घरेलू दूषित जल से संरक्षण सहित वृक्षारोपण राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन पशुपालन तालाबों का सुंदरीकरण मत्स्य पालन सहित अन्य मुद्दों पर कार्यशाला में चर्चा विस्तारपूर्वक विभागों के विशेषज्ञों द्वारा किया गया स्वच्छ भारत मिशन योजनांतर्गत ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन का प्लान तैयार करने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ जिलाधिकारी विजय किरन आनंद बाबा गंभीर नाथ प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे जिलाधिकारी ने कहा कि ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन का कार्य खुले में शौच मुक्त ग्राम पंचायत होने के उपरांत स्वच्छता में यह द्वितीय चरण है। इससे ग्राम पंचायतों को पूर्ण रूप से स्वच्छ बनाने के लिए ठोस एवं तरल कचरा का निष्पादन एवं साफ-सफाई रखने से बीमारियां कम होंगी एवं आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित की गई है। इस प्रशिक्षण में बताए गये सभी तकनीकी पहलुओं से सीख लेकर प्रत्येक ग्राम पंचायत को मॉडल एवं स्वच्छता में आदर्श ग्राम पंचायत तैयार करना है। कार्यशाला में सीडीओ इंद्रजीत सिंह डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ओ.डी.एफ. ग्राम पंचायतों के सचिव सभी तकनीकी सहायक कनिष्ट अभियंता सहायक अभियंता ब्लॉक समन्वयक एस एल डब्लू एम विशेषज्ञ सालीड बेस्ट मैनेजमेंट ट्रेनर सुरेश मास्टर ट्रेनर डॉ भूपेंद्र कुमार मौर्य मास्टर ट्रेनर अखिलेश गौतम राजीव नयन कंसलटेंट मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी सहायक निदेशक मत्स्य पालन संबंधित अन्य चाहिए डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि
कचरे से कंचन बनाया जा सकता है। इसके लिए छोटी-छोटी तकनीकी जानकारी रखना आवश्यक है। अगर हम इन तकनीकी का ध्यान रखे तो गांव को पूर्ण रूप से स्वच्छ एवं साफ-सुधरा बना सकते हैं और जिस कचरे को बेकार समझा जाता है उसका उपयोग गांव एवं घर में जैविक एवं अजैविक रूप से खाद बनाकर काम में ले सकते हैं। इसके लिए हमें नई तकनीकों की ओर ध्यान देेना होगा। यदि हमें तकनीक के हिसाब से कचरे को काम में ले तो गांव में भी स्वच्छता आएगी तथा गांवों को स्वरूप भी निखरेगा गोबर से गड्ढे में केंचुआ पैदा कर जैविक खाद बनाया जा सकता है घरों एवं प्रक्षेत्र में कूड़ा-करकट निरंतर बहुत मात्रा में निकलता रहता है कृषि प्रक्षेत्रों में जानवरों के गोबर मूत्र इत्यादि भी प्राप्त होते हैं। इनका सही, परिमार्जन का इनके पोषक तत्वों का उपयोग उत्पदान बढ़ाने में किया जाता है।केंचुआ गोबर सड़ी-गली पत्तियों जलकुंभी और जैविक पदार्थ खाता है। इनको खाने के बाद जो मलमूत्र त्याग करता है, यही वर्मी कम्पोस्ट या केंचुआ खाद है यह जमीन के लिए उच्च कोटि का संतुलित खाद है एवं जमीन की उर्वरा शक्ति में वृद्धि करता है। केंचुआ खाद में केंचुआ के अंडे भी रहते हैं। इसको आसानी से बनाया जा सकता है ग्राम विकास अधिकारी गांव में ग्रामीणों को जागरूक करें और स्वच्छता लाये।