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रामायण को आत्मसात कर अयोध्या में जीवंत करने पहुंचे फ्रांस के शिफूमी

 

अयोध्या एक धार्मिक नगरी होने के साथ ही आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करने वाला केंद्र भी है। नगरी के नायक भगवान राम सिर्फ एक नाम न होकर जननायक के रूप में पूज्य हैं।
यही वजह है कि राममंदिर के साथ रामनगरी के नवनिर्माण की बेला में अयोध्या को संवारने में लगे देश-दुनिया के लोगों का राम के प्रति समर्पण भी देखते बन रहा है। सात समुंदर पार से अयोध्या को सुंदर बनाने पहुंचे फ्रांस के जेरोम उर्फ शिफूमी ऐसे ही एक किरदार हैं। रामनगरी को सजाने से पहले उसके पौराणिक जीवन से परिचित होने के लिए शिफूमी ने फ्रांस में रामायण खरीद कर अपनी भाषा में उसका अध्ययन किया।

भगवान राम के अनन्य भक्त हनुमानजी से खास लगाव रखने वाले शिफूमी फ्रेंच भाषा में रामायण का अध्ययन करने के उपरांत राम और रामनगरी से भली-भांति परिचित होने यहां पहुंचे हैं। रामनगरी में पर्यटन की आत्मा के तौर पर जानी जाने वाली राम की पैड़ी के पुनरुद्धार में लगी संस्था मोजार्टो के वह महत्वपूर्ण अंग हैं। फ्रांस में स्ट्रासबर्ग के रहने वाले शिफूमी अभी महज 34 वर्ष के हैं, लेकिन पौराणिक कथाओं से किसी देश की संस्कृति को समझने में वह माहिर हैं। 2006 से एक टैटू आर्टिस्ट के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले शिफूमी का भारत से काफी लगाव है।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक विदेशी नागरिक के लैपटॉप अथवा मोबाइल स्क्रीन पर पाश्चात्य संस्कृति से जुड़े वालपेपर ही दिखते हैं, लेकिन शिफूमी के लैपटॉप पर शेरावाली विराजमान हैं। वह कहते हैं कि शेरावाली के दर्शन से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है, जबकि हनुमानजी से समर्पण एवं शक्ति मिलने का एहसास होता है। शिफूमी सात वर्षों तक कंबोडिया में भी रहे, जहां उन्हें रामायण के किरदारों को जानने का मौका मिला।

वह तीन वर्षों से मोजार्टो के साथ मिल कर कार्य कर रहे हैं। मोजार्टो की प्रोजेक्ट डायरेक्टर मीनाक्षी पायल के साथ रामकी पैड़ी के अवलोकन के दौरान उन्होंने अपने ²ष्टिकोण भी साझा किए, जिसके बाद राम के बैकुंठ गमन सहित माता सीता के पद चिह्न बनाने के अतिरिक्त शिफूमी ने अपने फेवरेट हनुमानजी का चित्रण भी शामिल किया।मोजार्टो के साथ कार्य करने के लिए वह पहले भी भारत आते रहे हैं। रामनगरी से पहले वह बनारस, चेन्नई, कोयंबटूर, ऋषिकेश एवं दिल्ली में पौराणिक कथा से जुड़ी चित्रकारी कर चुके हैं।

अयोध्या आकर शिफूजी काफी उत्साहित हैं। वह हिदी भाषी नहीं हैं, इसलिए प्रोजेक्ट डायरेक्टर के माध्यम से रामनगरी को लेकर अपने विचार साझा करते हुए वह कहते हैं ‘इट्स सो पीस फुल’। यानी यहां आकर उन्हें यह महसूस हुआ कि अयोध्या बहुत शांतिपूर्ण है। ऐसा की उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में रामनगरी के लिए मिलता है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर मीनाक्षी पायल का कहना है कि अयोध्या में कार्य करने के लिए शिफूमी से पूछा गया तो बिना सोच-विचार के उन्होंने तत्काल सहमति व्यक्त कर दी।

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