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इस महापर्व में भारत की गौरवशाली ज्ञान,शास्त्र परम्परा तथा अविच्छिन्न वेद की परम्परा का सुअवसर है–कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी

 

अजय कुमार उपाध्याय वाराणसी

इस विश्वविद्यालय ने ज्ञात और अज्ञात रुप में इस देश के स्वतंत्रता आन्दोलन मे जो अग्रणी महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन किया है उसका पूरा देश ऋणी हैं आज भी पूरे विश्व को जो दिशा निर्देश इस विश्वविद्यालय के द्वारा दिया जा रहा है वह अतुलनीय है।यह संस्था विश्व की प्राचीनतम संस्कृत शिक्षण संस्थान है जो की विगत 230 वर्षों से लगातार संस्कृत शास्त्रों का पान कराते हुये अग्रणी भूमिका निभा रहा है।भारत सरकार और देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 75 वें स्वतंत्रता दिवस को आजादी का अमृत महोत्सव के रूप में सम्पूर्ण राष्ट्र मना रहा है।इसमें पूरे देश की परम्परा और स्वधीनता संग्राम की परछाई और आजाद भारत की गौरवान्वित करने की प्रगतिभी है।

उक्त विचार आज सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय,वाराणसी के ऐतिहासिक मुख्य भवन के समक्ष 75 वें स्वतन्त्रता दिवस के राष्ट्रीय महापर्व पर झण्डारोहण करने के उपरांत पूर्वाहं 9:00बजे कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय परिवार एवं संस्कृत समाज को सम्बोधित करते हुये बतौर संरक्षक व्यक्त किये उस दौरान कुलपति प्रो त्रिपाठी ने कहा कि आज यह संस्था भारत के कोने कोने मे संस्कृत शास्त्रों के अध्ययन अध्यापन का मार्ग प्रशस्त करते हुये अनेकानेक महाविद्यालयो को सम्बद्ध करते हुये भारतीय संस्कृति और भारतीयता का भाव स्थापित कर रही हैं।

इस महापर्व में भारत की गौरवशाली ज्ञान परम्परा, शास्त्र परम्परा तथा अविच्छिन्न वेद की परम्परा का सुअवसर है,नई शिक्षा नीति में हम इसी भारतीय ज्ञान परम्परा के उद्घोष को साबित कर भारतीय ज्ञान राशि के परम्परा को विश्व पटल पर लाएंगे।हमारी स्वतंत्रता को आज अनेक वर्ष बीत गये हैं हम स्व-तन्त्र हो गये हैं स्व का अर्थ स्वंय और तन्त्र का अर्थ शास्त्र अर्थात हम अपनी जीवन चर्या को शास्त्रों (संविधान)के अधीन रहकर निर्वहन कर रहे हैं।इसका हमे गौरव है।हमारे सेना के जवान देश की सीमाओं पर तन्मयता के साथ खड़े होकर हमारी सुरक्षा कर रहे हैं वे सदैव जगकर और अपने प्राणौ की बाजी लगाकर हैं की हम चैन से सो सकें,हमारे बच्चे सुरक्षित और स्वतन्त्र जीवन जी सकें।

कुलपति प्रो त्रिपाठी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय संस्कृत-संस्कृति एवं संस्कार के धारा की धरा है,यहाँ के अध्यापक,अधिकारी,कर्मचारी एवं विद्यार्थी सभी अपने अपने दायित्वों का निर्वहन निरंतर निष्ठा,ईमानदारी और भाव से सम्पादित करते रहें तभी संस्कृत और देश सुरक्षित रहेगा।आज का यह पर्व वास्तविक रूप में यही संदेश सभी के लिये देता है।सम्पूर्ण विश्व इसी संस्था से संस्कार और कर्तव्य की आस रखता है।

स्वतंत्रता दिवस महापर्व के प्रारम्भ में कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने के द्वारा ध्वजारोहण,महात्मा गांधी,नेहरु जी,चंद्रशेखर आजाद एवं डॉ सम्पूर्णानन्द जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा संगीत एनसीसी छात्रों के परेड का निरिक्षण किया गया।सभी के साथ सामूहिक राष्ट्रगान एवं संगीत विभाग के द्वारा कुलगीत गाया गया।

उस दौरान विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्य,एनसीसी के अधिकारी सहित गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया।
इसके साथ साथ कुलपति प्रो त्रिपाठी ने कुलपति आवास एवं छात्रसंघ भवन पर भी झन्डारोहण करके सभी को स्वतंत्रता दिवस के वास्तविक कर्तव्य का संज्ञान कराते हुये अपने प्रति निष्ठाईमानदारी का मूल मंत्र भी दिया।

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