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गुरु पुर्णिमा 24 को व सावन मास 25 जुलाई से प्रारम्भ।

महादेव कि अराधना करने का सर्वोत्तम माह है सावन।

 

रिपोर्ट ब्यूरो

 

गोरखपुर। भारतीय विद्वत् महासंघ के महामंत्री तथा भारतीय युवा जनकल्याण समिति के संस्थापक व संरक्षक पं.बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य ने बताया कि गुरु पर्व तथा गुरु पूर्णिमा का त्योहार प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु के प्रति सम्मान अथवा श्रद्धा सुमन अर्पित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है, गुरु पूर्णिमा इस बार 24 जुलाई दिन शनिवार को है! यह पर्व महर्षि वेदव्यास जो हिंदू महाकाव्य महाभारत के रचयिता,पुराणों के लेखक व भारतवर्ष के सम्मानित गुरु हैं तथा जिन्हे गुरु-शिष्य परम्परा का आदर्श माना गया है के सम्मान में यह पर्व मनाया जाता है.

बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह दिवस अत्यंत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि भगवान बुद्ध ने इसी दिन बोध गया में ज्ञान प्राप्ति के अनंतर अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया था. जैन धर्म में मान्यता है कि 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने कैवल्य की प्राप्ति के उपरांत इसी दिन इंद्रभूमि गौतम को अपना प्रथम शिष्य बनाया तथा स्वयं गुरु कहलाये। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का दर्शन पूजन करना बहुत ही पुण्यदायी माना गया है, गुरु दीक्षा लेने के लिए यह सर्वोत्तम मुहूर्त है, दान पूण्य करना विशेष फलदायी होता है.

साथ ही पं.बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य जी ने शिव जी के अति प्रिय मास श्रावण मास कि महत्ता का वर्णन करते हुए बताये कि श्रावण मास 25 जुलाई दिन रविवार से प्रारम्भ हो रहा है तथा 22 अगस्त को श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबंधन व संस्कृत दिवस मनाते हुए सम्पन्न होगा। सावन के महीने में शंकर भगवान की पूजा करना और उन्हें जल चढ़ाना बहुत फलदायी माना जाता है. शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव इस माह में सोमवार का व्रत करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. सावन के महीने में भगवान शिव और विष्णु की अराधना बहुत फलदायी मानी जाती है.इस बार श्रावण मास मे चार सोमवार का अद्भुत संयोग है,प्रथम सोमवार 26 जुलाई, द्वितीय सोमवार 2 अगस्त,तृतीय सोमवार 9 अगस्त तथा चतुर्थ एवं अंतिम सोमवार 16 अगस्त को है 22 अगस्त को सावन मास का समापन है। ऐसा माना जाता है कि सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन से सभी तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है।सावन के महीने के आखिर में रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है।  सावन का सोमवार व्रत मानव जीवन में सुख समृद्धि खुशहाली को लेकर आता है। श्री पाण्डेय जी ने यह भी बताया कि इस सावन मास में शिव भक्तों को ज्योतिर्लिंगों का दर्शन एवं जलाभिषेक करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है तथा वह शिवलोक को प्राप्त करते हैं इस मास में कन्याओं के दुर्लभ संयोग बेहद सुखद होता है जिसमें सोमवार व्रत से कन्याओं के विवाह सम्बन्धी समस्त समस्याएं दूर होती हैं एवं मनचाहा सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है, सावन मास में चतुर्मास भगवान विष्णु का पूजन भी श्रेष्ठ माना जाता है भगवान शिव को पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं! दूध, दही, शहद, गंगाजल, कूशोदक आदि से रुद्राभिषेक करने से सभी मनोकामनाओं कि पूर्ति होती है. भगवान शिवजी को बेलपत्र,भांग,धतूरा,मदार,बैर अतिप्रिय है.अपनी कामनाओं के लिए करे रुद्राभिषेक–धन एवं विद्या प्राप्ति के लिए गाय के दूध एवं शक्कर मिश्रित, शत्रु पराजय के लिए सरसों के तेल से, रोग शांति के लिए गंगाजल में कुल डालकर, आकर्षण एवं सम्मोहन के लिए शहद से, दूध एवं घी से संतान प्राप्ति के लिए,ईख के रस से धन सम्पदा प्राप्ति के लिए,धन इच्छा प्राप्ति हेतु खीर से अभिषेक करें!गाय के दूध से अभिषेक करने से सभी मनोरथ कार्य पूर्ण होते हैं.मारकेश तथा मारक कि दशा चल रही हो तो मृतक संजीवनी महामृत्युजंय मंत्र के साॅवा लाख जप कराकर अभिषेक करें एवं काल सर्प दोष के निवारण हेतु शिव पूजन व दर्शन अत्यन्त फलदायी व श्रेयस्कर होता है।

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