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बेतिया: शिक्षकों ने सोशल मीडिया को बनाया हथियार, शुरू किया ट्विटर वार, निशाने पर केंद्र व राज्य की NDA सरकार

बेतिया:-शिक्षकों ने सोशल मीडिया को बनाया हथियार, शुरू किया ट्विटर वार, निशाने पर केंद्र व राज्य की NDA सरकार
बेतिया:- ‘समान काम समान वेतन’ को ले सड़क से सदन तक संघर्ष, सरकार को ज्ञापन एवं न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के बाद शिक्षक अब सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाए हैं। समान काम समान वेतन के लिए शिक्षक सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म फेसबुक और ट्विटर पर उतर आए हैं और इसके जरिए भी सरकार व समाज तक अपनी बात पहुँचा रहें हैं। TET STET उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ (गोपगुट) पश्चिम चम्पारण, बिहार के जिला सोशल मीडिया प्रभारी सुनिल कुमार राउत ने संघ के हवाले से कहा कि समान काम समान वेतन हम शिक्षकों का संवैधानिक अधिकार है और संघ द्वारा उसके लिए सड़क से सदन, न्यायालय सभी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। संघ के प्रयास से विगत दिनों से शिक्षकों द्वारा सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ी गई है ताकि सरकार व जनता तक अपनी बात पहुंचाई जा सके जिसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से शिक्षकों के समान वेतन मांग को विपक्ष के नेताओं का समर्थन मिल रहा है।
सूबे के शिक्षक सरकार की हठधर्मिता, वादाखिलाफी के कारण ही आंदोलन को विवश हैं। सरकार ने पूर्व में कहा था हाईकोर्ट का निर्णय मान्य होगा किंतु समान काम समान वेतन के लिए जब संघ माननीय उच्च न्यायालय पटना के शरण में गया जहाँ से शिक्षकों को जीत हासिल हुई किंतु सरकार निर्णय के विरुद्ध सुप्रीमकोर्ट चली गई जिसके कारण शिक्षक संघ वहाँ भी संघर्षरत हैं। मामले में अगली एवं अंतिम सुनवाई 12 जुलाई होनी है। शिक्षकों को न्यायालय से सकारत्मक न्याय की उम्मीदें है। माननीय सुप्रीमकोर्ट ने ही एक सिविल अपील पर सुनवाई करते हुए समान काम समान वेतन का न्यायादेश दिया है।
संघ द्वारा देश के महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री एवं महाधिवक्ता (AG) को पत्र लिख कर समान काम समान वेतन की मांग की गई है। सरकार शिक्षकों को ससमय व समान वेतन ना देकर शारीरिक, आर्थिक व मानसिक शोषण कर रही है। सरकार मंशा इसी बात से परिलक्षित होती है कि ईद पूर्व वेतन भुगतान की घोषणा के बावजूद भी वेतन नहीं मिला। समान काम समान वेतन की न्यायिक संघर्ष की चुनौतियां, स्कूली शिक्षा में नीतिगत संकट एवं हमारी भूमिका विषय पर 24 जून को गांधी संग्रहालय, पटना में राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था जिसमें विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि वक्ताओं द्वारा विभिन्न विचार सामने आए। संघ के प्रदेश अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक ने कहा शिक्षकों को ससमय, समान वेतन मिलनी चाहिए ताकि उन्हें जॉब सेटिस्फेक्शन हो जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक है। साथ ही शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करते हुए समान स्कूल प्रणाली लागू की जाय।
समान काम समान वेतन नहीं तो NDA को वोट नहीं।
सरकार द्वारा विगत चार सत्रों की डीएलएड की वार्षिक परीक्षा आयोजित नहीं करने से प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रशिक्षण का ह्रास हो रहा है जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित होगी साथ ही शिक्षकों को प्रशिक्षण के बावजूद भी अप्रशिक्षित का दंश झेलना पड़ रहा है जिससे हर माह 5-10 हजार रुपए का आर्थिक नुकसान हो रहा है। संघ ने सरकार से डी.एल.एड की लम्बित परीक्षा अविलम्ब परीक्षा कराने व उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की सम्पूर्ण बहाली की मांग की है अन्यथा शिक्षक आंदोलन को विवश होंगे।
 
रिपोर्ट दिवाकर कुमार ibn24x7news

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