ब्यूरो रिपोर्ट सत्यम सिंह IBN NEWS अयोध्या
मिल्कीपुर आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के निदेशक प्रसार प्रोफेसर ए पी राव ने मुलाकात में बताया कि यास तूफान के असर से तीन दिन से लगातार बारिश का मौसम बना हुआ है।तापमान में भी काफी गिरावट दर्ज की गई है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस तूफान के कारण मानसून के आने में विलम्ब हो सकता है। खेती किसानी के लिये यह बारिश कुछ किसानों के लिए वरदान तथा कुछ किसानों के लिए अभिशाप साबित हो रही है।
मेन्था, उर्द, मूंग एवं सब्जी किसानों को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। मेन्था की फसल कटाई अवस्था पर है, किसान मेन्था की कटाई एवं तेल निष्कासन का कार्य आरम्भ कर चुके थे। किन्तु बारिश के कारण कटाई कार्य बाधित हो गया है। फसल के अच्छी तरह सूखने एवं प्रक्षेत्र में सूखे की स्थिति आने पर ही कटाई कार्य प्रारम्भ हो सकेगी। समय से बोई ग्रीष्मकालीन उर्द एवं मूंग की फसल भी पकने की अवस्था में है, यदि फलियां तैयार हो गई होगीं तो बारिश के कारण जमाव होने लगेगा एवं गुणवत्ता प्रभावित होगी।
विलम्ब की फसलो में उचित जल निकास की व्यवस्था करें अन्यथा फसल अधिक नमी से गल जायेंगी। सब्जियों की कद्दू वर्गीय फसलों लौकी, कद्दू, करेला, तरोई, करेला में सबसे अधिक नुकसान देखा जा रहा है। यदि जल निकास की उचित व्यवस्था हो तो झालर का निर्माण करें जिससे वर्षा ऋतु में लता वाली सब्जियों का झालर विधि से उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
लगातार बारिश का सबसे अधिक फायदा गन्ना किसानों को मिल रहा है। रिमझिम वर्षा गन्ना के लिये वरदान साबित हो रही है। ताकते एवं यास तूफानों की बारिश से न सिर्फ गन्ने की फसल को पर्याप्त नमी मिल रही है बल्कि सिंचाई लागत में भी कमी आई है। कम तापमान होने से फसल की बढ़वार में भी काफी मदद मिल रही है।
खाली प्रक्षेत्रों में पर्याप्त नमी उपलब्ध हो गई है। किसान भाइयों को चाहिये कि ओट आने पर उचित जुताई करके खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, उर्द, मूंग, अरहर, तिल की उन्नतशील प्रजातियों की समय से बुआई करें। मघ्यम से निचले प्रक्षेत्रों में जहाॅ जलभराव की समस्या रहती है वहां रोपित धान हेतु धान की नर्सरी खेत में नमी रहते डाल दें।
उपरिहार प्रक्षेत्रों पर धान के बीज की सीधी बुआई करें। खरपतवार प्रबन्धन के लिए बुआई के तुरन्त बाद पेंडीमेथलीन दवा की 3.3 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। पाइरैजोसलफ्यूरान ईथाइल दवा का भी प्रयोग 200 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से किया जा सकता है। अन्य फसलें जैसे मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, अरहर, तिल एवं मूंगफली की बुवाई जून के प्रथम सप्ताह में करके प्रक्षेत्र में उपलब्ध नमी का भरपूर उपयोग किया जा सकता है।