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गंभीर हाल में पीएचसी पर उपचार के लिए आए व्यक्ति की मौत के बाद परिजनों ने किया उपद्रव।

 

श्याम हॉस्पिटल खजनी मरीज को ना देखने पर संचालक के साथ किए गाली-गलौज व मारने की दी धमकी,पीएचसी पहुंचते पहुंचते मरीज की हुइ मौत

रिपोर्ट रामप्रताप

गोरखपुर। खजनी पीएचसी में गंभीर हालत में उपचार के लिए लाए गए अधेड़ व्यक्ति की मौत हो गई। आक्रोशित परिजनों ने पीएचसी के डॉक्टर एखलाक के साथ मारपीट शुरू कर दी। बचाव के लिए पहुंचे अन्य डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ भी मृतक के परिजनों ने हाथापाई की। इस दौरान पीएचसी पर मौजूद डाक्टरों और स्वास्थकर्मीयों के बचाव और सुरक्षा के लिए पीएचसी का दरवाजा बंद कर दिया। जिसे उपद्रवियों ने तोड़ दिया। उपद्रवियों के हमले से बचाव के लिए पीएचसी के डाॅक्टरों और स्वास्थकर्मियों को एक कमरे में बंद रहना पड़ा। इस दौरान मृतक के परिजनों ने खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए और पथराव किया। सूचना मिलने पर भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष खजनी मृत्युंजय राय ने मृतक के परिजनों को समझाने बुझाने का प्रयास किया लेकिन परिजनों ने उनकी एक न सुनी
तत्काल मौके पर पहुंचे एसडीएम खजनी पंकज दीक्षित ने परिजनों को कार्यवाही का भरोसा दिया और मृतक के शव को पुलिस अभिरक्षा में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅक्टर सुधाकर पाण्डेय ने खजनी पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डाक्टर प्रदीप कुमार तिवारी से घटना की जानकारी ली और उन्होंने एसडीएम खजनी से पीएचसी के डाॅक्टरों और स्वास्थकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा दोषियों के खिलाफ कार्यवाही के लिए कहा। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि गंभीर हालत में उपचार के लिए लाए गए व्यक्ति के इलाज में लापरवाही हुई। जिससे उसकी मौत हो गई तथा विरोध करने पर उन्हें पीएचसी के डॉक्टरों और कर्मचारियों के द्वारा मारा-पीटा गया। इस संदर्भ में खजनी पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डाक्टर प्रदीप कुमार तिवारी ने बताया कि मरीज को अंतिम स्टेज में उपचार के लिए लाया गया था। उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। परिजनों ने कोविड जांच भी नहीं कराने दिया और तत्काल उपचार के लिए दबाव बनाने लगे। मृतक का उपचार करने वाले पीएचसी के डाॅक्टर एखलाक के साथ मृतक के परिजनों ने मारपीट शुरू कर दी। बचाव और प्रतिरक्षा में मृतक के परिजनों के साथ झड़प हुई। जिसमें दोनों पक्षों के लोगों को चोट आई और कपड़े आदि फट गए हैं। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौर में संदिग्ध मरीजों के उपचार में अपनी जान जोखिम में डाल कर कार्य करने वाले डाॅक्टरों और स्वास्थकर्मियों के साथ मारपीट करने वाले मृतक के परिजनों ने पीएचसी में तोड़फोड़ की और जमकर उपद्रव मचाया तथा जान से मारने की कोशिश की गई। घटना के दौरान पीएचसी के वैक्सीनेशन सेंटर पर वैक्सीन लगाने का काम 2-3 घंटे तक बंद रहा।
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हस्तक्षेप से किसी तरह विवाद शांत हुआ। अनौपचारिक बातचीत में एमओआईसी डाॅक्टर प्रदीप तिवारी ने बताया कि ऐसी विषम परिस्थितियों में लोगों का इलाज करना और स्वास्थ सेवाएं देना संभव नहीं, वैक्सीन लगाने वाली नर्स और स्टाॅफ के लोग भय से थरथर कांप रहे थे। उपद्रवियों ने तोड़ फोड़ की गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देते हुए हमले करते रहे ईंट पत्थर चलाए। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में ड्यूटी करने की बजाय अपने पद से इस्तीफा देना बेहतर लग रहा है।
इस दौरान मौके पर थानाध्यक्ष गीडा, हरपुर बुदहट समेत अतिरिक्त फोर्स बुला ली गई थी।

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