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गो माता की कथा सकल को दुखों को मिटाने वाली है परमात्मा ने अवसर प्रदान किया है

रिपोर्ट प्रमोद कुमार गर्ग IBN NEWS बिगोद राजस्थान

बीगोद– कस्बे के चामुंडा माता गौशाला परिसर में भुजिया साध्वी आराधना गोपाल सरस्वती जी ने श्री मुख से गुरु की महिमा का बखान किया गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर साक्षात ब्रह्म तस्मै श्री गुरुदेव नमः की स्तुति सनातन धर्म भैरूनाथ जगदंबे चावंड माता चारभुजा नाथ की स्तुति कर गौ माता की जय कार लगाकर गो कथा शुरू की सारे जगत को प्रकाशित करने वाले जिनके दर्शन मात्र से जीवन के अनंत पाप धुल जाते हैं जिन के चरणों का स्पर्श मात्र से युग के जीवन में आनंद की अनुभूति होने लगती है ऐसे परम पूज्य सद्गुरु भगवान की अनंत अनंत को प्रणाम किया इनके 33 करोड़ देवता निवास करते हैं सींग पर पूरी पृथ्वी का भार है। जिनके को मूत्र से बहती है कल कल गंगा गोबर माता मैया लक्ष्मी रमा का वास जगत जननी के रूप में दुलारी जगत जननी हैं।

साध्वी आराधना गोपाल सरस्वती जी के श्री मुख से कथा श्रवण कराती हुई

सत्संग के बारे में प्रसंग के माध्यम से कथा में बताया की जैसे बच्चों के गुरु जी होते हैं वैसे ही चोरों के गुरु जी होते हैं जो चोरों को शिक्षा दिया करते हैं। कैसे चोरी करनी है कितने बजे चोरी करनी है। दीवार पर छेद कैसे करना। 1 साल की शिक्षा होती है सारी बातें चोरों को सिखाते हैं सभी चोर 1 साल में शिक्षा दीक्षा पूरी होने पर दीक्षांत समारोह के आयोजन में सबसे बड़े चोर को बुलाया जाता है सारे चोर विद्यार्थी को बड़े चोर बताते हैं जीवन में आगे बढ़ना तो खूब चोरी करना लोगों को मारना पीटना बस जीवन में एक बात ध्यान रखना जिसने कथा व सत्संग सुन लिया उसी दिन से धंधा का धीरे धीरे कम हो जाएगा|

इसलिए कथा व सत्संग कभी मत सुनना यह बात सब चोरों को सिखायी चोरों के गुरु जी ने सिखाई। चोर चोरी करने गांव में पहुंचा क्या कथा सत्संग चल रहा था विचार किया कि सत्संग और कथा में चोरी कैसे करूंगा सत्संग भी नहीं सुनना विचार किया चोरों के गुरु जी ने मना किया सत्संग नहीं सुनना। सत्संग देखने के लिए नहीं मना किया। चोर कानों में उंगलियां डालकर देखता निकल गया। संयोगवश पांडाल में चोर के पैर में बड़ा कांटा चुभ गया। सत्संग पंडाल में कांटा नहीं होता है लेकिन हरि कृपा से ही चोर के पैर में कांटा चुभ गया विचार किया की पांडाल से बाहर निकल दो कदम आगे बढ़ा तो पैर में सुबह काटे में दर्द सहन नहीं हो पा रहा था तुरंत कानों से उंगलियां हटाकर कांटा निकालने लगा।

महात्मा कथा कह रहे थे व सत्संग में बता रहे थे कि दया करो दया करो चोर ने काटा निकालने के लिए कानों से उंगली बाहर निकाली तो। और के कानों में सत्संग का एक शब्द दया कान में सुनाई दिया चोर पांडाल से बार आया। चोर ने बाहर आकर देखा तो गौ माता की पीठ पर घाव हो रहा था तभी चोर के मन में दया जागी और उसने गाय की पीठ पर घाव हो रहा ।दया भाव से कुछ करने की सोची। चोरों में कभी दया नहीं होती है लेकिन सत्संग व कथा सुनने से उनमें दया जागी। दीदी ने संस्मरण सुना कर सत्संग के महत्व के बारे में बताया।गौ कथा मे गाँव के वरिष्ठ नागरिक प्रबुद्ध जन महिलाएं कथा का आनंद लेकर नृत्य कर रही थी कथा में आए अतिथियों का माल्यार्पण व दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया। कथा समापन पर आयोजक व अतिथियों द्वारा आरती कर प्रसाद वितरण किया गया।

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