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मिर्जापुर – बेचूआ रे बेचूआ, छोड़ देब्अ हो बेचूआ

हरिकिशन अग्रहरि की रिपोर्ट
अहरौरा – मीरजापुर। मानसिक रोगियों मिलन स्थल कहे या भूत प्रेतों का मेला या कहें अंधविश्वास का नंगा नाच? शरीर पर अस्त व्यस्त कपड़ों में बाल खोले सैकड़ों महिलाओं का अट्टाहास आम आदमी का ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है। आंखें लाल – लाल, एकटक, नाचती देखकर सामान्य आदमी के रोंगटे खड़े कर देती है। थोड़ी बहुत ध्यान से इन झूमती, नाचती, गाती महिलाओं को देख लीजिए अनयास आपका शरीर हिलने लगेगा और पीछे से बेचूवीर की जय की आवाज़ आने लगेगी। मृत व्यक्तियों की आत्मा किसी पर हावी होती है, कैसे होती है? क्या चाहती है? कोई गीत गाकर बतता है तो यूँ ही बताता है लेकिन बेचूआ हो बेचूआ जरूर बोलता है। यह सब कुछ होता है उत्तर प्रदेश के जनपद मीरजापुर के थाना अहरौरा के अंतर्गत पड़ने वाले ग्राम बरही में जहाँ बेचूवीर बाबा और बरहीया माई की चौरी है। यह मेला अन्तर्प्रांतीय है। यहाँ उड़ीसा, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र आदि राज्यों से लोगों का जमावड़ा होता है। इन लोगों का मानना रहता है कि इनको प्रेत बाधा से आराम मिलता है और शरीरिक बाधा लगातार पांच बार यहाँ आने से समाप्त हो जाता है। बांझपन की शिकार दवा दुआओं से हार चुकी हजारों महिलाओं की यहाँ भीड़ जमा होती है जिनको भीड़ से विश्वास मिलती है। छोटे छोटे बच्चों का मुंडन संस्कार को देखकर नि:संतान दम्पत्तिओं में आस्था का जन्म होता है। मेले में लगता है कि दुखियों का संसार यहाँ इकट्ठा हो गया है। बाबा की चौरी से एक किलोमीटर भीड़ को देखते हुए वाहनों का प्रवेश वर्जित प्रशासन करता है सो पद यात्रा के दौरान इस एक किलोमीटर के रास्ते को कुष्ठ रोग पीड़ित भिक्षा मांगने वाले पेशेवर कब्जा जमा लेते हैं जिन्हें देखकर लगता है कि नर्क दर्शन यही है। चारों ओर पुराने कपड़ों से घिरे बांस बल्लियों की दुकान सजी होती है जिस पर धूल पटी रहती है। मेला परिसर की आमदनी को देखते हुए मेला समिति के लोग और पुजारी आपस में भिड़े रहते हैं। चूंकि आदिवासी और वनवासी समाज का बड़ा कुनबा यहाँ की मूल निवासी है जो गरीबी से पीड़ित हैं को भी अपनी हिस्सेदारी की चाह होती है लेकिन इनकी सुनता कौन है? इनकी जमीनों को गाड़ियों से रौद दिया जाता है, मेड़ तोड़ दिया जाता है और गंदगी मेला समाप्ति के बाद इनके हिस्से छोड़ दिया जाता है।
कई लाख की भीड़ को नियंत्रित करने की, मेला सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी एस डी एम चुनार और थाना प्रभारी अहरौरा मनोज ठाकुर की है। इस मेले में यातायात व्यवस्था संभालना, खोया पाया और चोरों को नियंत्रित करना होता है जो पिछली बार आखिरी दिन सब ध्वस्त हुआ था।

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