Ibn news Team DEORIA
दिनेश गुप्ता पत्रकार

पकुआ खा के दादा जियले,
मडुआ खा के बाप,
बेटवा खाला बर्गर पिज़्ज़ा बने लल्लनटाप !
पहिरी लँगोटी दादा जियले,
धोती पहिर के बाप,
फाटल जिन्स बेटउवा पहिरे बने लल्लनटाप !
वेद पुराण के दादा पढ़ले,
रामायण के बाप,
मस्तराम के बेटवा पढ़ के करत फिरे पाप !
घर बहरी से घूँघट गइल,
भावत नइखे साड़ी,
नयकी बहुरिया जिन्स चढ़ा के घुमें बीच बाज़ारी!
दूध दही अब भावत नइखे,
लोग माँगेला दारु,
माई बाप के मान ना बांचल पुज्य भइल मेहरारु !
भाई भाई में लउकत नइखे,
भाई जइसन प्यार,
सांझ बिहाने लड़े अखाड़ा बन के हिस्सेदार!
सास पतोह के छोह पराइल,
अजब के भइल नाता,
करे लड़ाई सवतिन जइसन राखस लाज विधाता !
बर पकड़ी सब बुढ़ हो गइले,
पीपर भइल बेहाल,
गाँव नगर के लोग के लागे तड़कुल तर चौपाल !
भरम धरम के कइसे बाँची,
कइसे बाँची रीत,
नाम के आगे व्यास लगाके गावे गंदा गीत !
*रचना -* मेरी कलम से ✍️