फरीदाबाद से बी.आर. मुराद की रिपोर्ट | IBN24x7NEWS
फरीदाबाद में इस्लामिक नए साल के पहले महीने मोहर्रम की 10 तारीख पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आस्था से परिपूर्ण ताजिया जुलूस निकाले गए।
जुलूसों में लोगों ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए या हुसैन के नारों के साथ शांति और श्रद्धा का परिचय दिया।
📍 ताजिया जुलूस की परंपरा और मार्ग
इस्लामी इतिहास के अनुसार, मुगल बादशाह तैमूर के समय से मोहर्रम में ताजिया जुलूस निकालने की परंपरा चली आ रही है, जिसे आज भी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाया जाता है।
फरीदाबाद के जिन क्षेत्रों से प्रमुख ताजिए निकले:
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सेक्टर-29 किसान मजदूर कॉलोनी — जावेद खान द्वारा
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संत नगर और राजीव नगर — रियाज खान द्वारा
इन ताजियाओं को शहर की सबसे सुंदर व सजावटी ताजिया माना गया।
जुलूस का मार्ग था:
👉 सेक्टर-29 → मेन बाजार ओल्ड फरीदाबाद → गांव दोलताबाद → सेक्टर-19 स्थित बाबा नूरूद्दीन की दरगाह पर समापन।
✨ सजावट व समयबद्धता बनी चर्चा का विषय
जावेद खान ने बताया कि,
“इस बार हमने समय से ताजिया जुलूस निकाला, और इसे आकर्षक तरीके से सजाया गया, ताकि लोग इमाम हुसैन की याद में एकजुट होकर धर्म और इंसानियत की मिसाल पेश करें।”
रियाज खान द्वारा निकाली गई ताजिया भी सौंदर्य और आकर्षण में पीछे नहीं रही, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु जुटे।
👮♂️ सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
मोहर्रम के इस पावन अवसर पर स्थानीय प्रशासन व पुलिस द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
हर मार्ग पर पुलिस बल और निगरानी टीम तैनात रही ताकि जुलूस शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से सम्पन्न हो।
🤝 सौहार्द और भाईचारे की झलक
जुलूसों में अन्य समुदायों के लोग भी शामिल हुए, जिससे फरीदाबाद की गंगा-जमुनी तहज़ीब की अद्भुत झलक देखने को मिली।
“हजरत इमाम हुसैन की शहादत अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है, जिसे सभी धर्मों के लोगों ने सम्मान दिया।”