Ibn news Team DEORIA
देवरिया/जिला सम्वाददाता
सुभाष चंद्र यादव
देवरिया जिले के खुखुंदू निवासी विन्ध्याचल ने बताया कि
दीपावली, छठ और भैया दूज जैसे प्रमुख त्योहारों के करीब आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। इन अवसरों पर मिट्टी के बने दीये, घड़े, कलश और अन्य बर्तनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बढ़ती डिमांड को देखते हुए दिन-रात मेहनत कर तैयारी शुरू कर दी है।
कुम्हारों द्वारा तैयार किए जा रहे सामान
दीपक: दीपावली का मुख्य आकर्षण। कुम्हार विभिन्न आकार और डिजाइन के दीये तैयार कर रहे हैं।
घड़ा: छठ पूजा में अर्घ्य देने के लिए घड़े की सबसे अधिक मांग रहती है।
कलश: पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में कलश का विशेष महत्व है।
पचकोशी घड़ा: विशेष पूजन-अर्चना में प्रयुक्त पाँच छोटे घड़ों का समूह, जिसकी मांग खास तौर पर रहती है।
कुम्हारों के लिए त्योहारों का महत्व
यह साल का वह समय है जब कुम्हारों की आमदनी सबसे अधिक होती है। दीपावली और छठ के मौके पर मिट्टी के बर्तनों की बिक्री से उन्हें अच्छा लाभ मिलता है। साथ ही, विदेशी और खासकर चीनी सामानों पर रोक लगाने की अपील से भी परंपरागत दीयों की मांग बढ़ी है। इससे कुम्हारों को न सिर्फ रोजगार मिलता है, बल्कि उनकी पुरानी कला और परंपरा को भी सहारा मिलता है।
चुनौतियाँ भी कम नहीं
हालांकि कुम्हारों के सामने बढ़ती लागत और बाजार में उपलब्ध सस्ते विकल्पों की चुनौती भी है। इसके बावजूद, लोग आज भी त्योहारों पर पारंपरिक मिट्टी के दीये और घड़ों को ही प्राथमिकता देते हैं।
कुम्हारों का कहना है कि अगर सरकार और समाज दोनों का सहयोग मिले तो उनकी परंपरागत कला आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकती है।