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दिनेश गुप्ता

देवरिया। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के साथ फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन को टिकाऊ बनाने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ प्राकृतिक खेती को अपनाना जरूरी है। यह बात उन्होंने उपकार के 37वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर कही।
कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार रबी सत्र में किसानों को 12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज अनुदान पर उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही 10 लाख किसानों को दलहन एवं तिलहन की मिनीकिट निःशुल्क वितरित की जाएंगी। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना, दलहन-तिलहन की खेती को प्रोत्साहित करना और कृषि उत्पादन में विविधता लाना है।
उन्होंने प्रदेश की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जबकि देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में प्रदेश का योगदान करीब 22 प्रतिशत है। प्रदेश में 196 प्रतिशत फसल सघनता कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कृषि क्षेत्र की इस क्षमता को बनाए रखने के लिए किसानों को नई तकनीकों और बेहतर कृषि पद्धतियों से जोड़ने की आवश्यकता है।
*पराली जलाने के बजाय आय बढ़ाने पर जोर*
कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेष यानी पराली न जलाएं। पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। उन्होंने फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन और उनके उपयोग से किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्थापित किए जा रहे 600 संपीड़ित जैव गैस (सीबीजी) प्लांट किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा कर सकते हैं। कृषि अवशेषों का उपयोग जैव ऊर्जा उत्पादन में करके पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है।
*कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों का सम्मान*
स्थापना दिवस समारोह के दौरान कृषि अनुसंधान, तकनीकी प्रसार और किसानों के हित में किए गए कार्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नौ कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), उत्कृष्ट वैज्ञानिकों और सात प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। समारोह में कृषि क्षेत्र में नवाचार, वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया।
कृषि मंत्री ने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और संबंधित संस्थानों से मिलकर काम करने का आह्वान किया, ताकि प्रदेश की कृषि व्यवस्था को अधिक उत्पादक, पर्यावरण अनुकूल और किसानों के लिए लाभकारी बनाया जा सके।