✒️ प्रणव तिवारी
देवरियाप: यूपी के देवरिया जिला मुख्यालय से 11 किमी व देवरिया सलेमपुर मुख्यमार्ग से लगभग 3 किमी दूरी पर अहिल्यापुर देवी मंदिर, नवरात्रि में भक्त के लिए आस्था का केंद्र बना रहता है। यहां पहले दिन से लेकर अंतिम दिन तक भक्त यहां आकर दर्शन पूजन कर मनोकामनाएं मांगते हैं।मान्यता है कि मां सभी की मन्नत पूरी करती हैं।

मां के चमत्कार के आगे ब्रिटिश भी झुकाते थे सिर
अहिल्यापुर दुर्गा मंदिर का इतिहास बेहद पुराना व दिलचस्प है. बताया जाता है कि प्राचीन काल में एक राजा कुष्ठ से पीड़ित होने के नाते अपना राजपाट छोड़ अज्ञातवास को चले, चलते चलते अहिल्यापुर मां के वन में पहुचे व रात्री विश्राम किया सुबह दैनिक क्रिया कर्म के बाद स्वच्छ पानी की तलाश में नजर दौड़ाई तो अदृश्य मां पिंड के पास कुछ स्वच्छ जल दिखा तो राजा ने पहुंचकर अंजुली से जलग्रहण किया और राजा का कुष्ठ ठीक हो गया अज्ञातवास राजा ने खपरैल से मां का मंदिर बनाया और आगे को बढ़ गए।कुछ वर्षों के बिताने के बाद वह भी खपरैल का मंदिर अपना अस्तित्व समाप्त कर दिया है। अंग्रेजी हूकूमत को भी आदि शक्ति मां दुर्गा के समक्ष शीश झुकाना पड़ा. दरअसल गोरखपुर से छपरा तक ब्रिटिश हुकूमत की देखेरख में रेलवे लाइन बिछाई जा रही थी। रेलवे लाइन को आज जहां मंदिर है, उस स्थान पर मां के पिंड से होकर गुजारना था,पिंड के बीचों-बीच से दिन में रेल पटरी बिछाते लेकिन अगली सुबह में वह पटरी उखड़ी हुई मिलती थी, यह क्रम कई दिनों तक चला।
अंग्रेज अफसरों को शक था कि स्थानीय लोग ऐसा कर रहे हैं इसलिए उन्होंने रात में रुकने का मन बनाया. आधी रात में स्वप्न में मां दुर्गा ने ऐसा करने से मना किया और तो अंग्रेज अफसर दंग रह गया और उच्चाधिकारियों को जानकारी के बाद पटरी को 100 मीटर से अधिक दूरी से होकर बिछाया गया जो टेडी रेलवे लाइन आज भी दिखती है।अंग्रेज अफसरों ने पुनः मां के शक्तिपीठ का जीर्णोद्धार कार्य भी कराया. नवरात्रि में दूर-दूर से भक्त अपनी मन्नतें लेकर आते हैं। भक्तों के मन्नतों को मां पूरा करती है। राज्य सरकार ने अब इसे पर्यटक स्थल के रूप चयनित कर लिया है।मां के दरबार में एक संस्कृत महाविद्यालय ,एक रैन बसेरा सहित एक बहुत बड़ा कथा मंच पंडाल बिल्डिंग, एक प्राचीन कुआं व दर्जनों सुलभ शौचालय मौजूद हैं।