राकेश पाण्डेय
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती की तमाम कहानियों के बीच सच्चाई यह है कि भारत-अमेरिका संबंधों में इस समय टैरिफ युद्ध हावी है। अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर 50% से ज्यादा का टैरिफ लगना शुरू हो चुका है, और इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ रहा है।
📉 सेंसेक्स और निवेशकों पर तगड़ा झटका
टैरिफ लगने के पहले ही दिन सेंसेक्स 849 अंक गिर गया और निवेशकों को लगभग 5.41 लाख करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का पूंजीकरण घटकर 449.45 लाख करोड़ रह गया।
🏭 सबसे ज्यादा मार कपड़ा उद्योग पर
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कई कपड़ा कारखानों ने या तो उत्पादन घटाने या बंद करने का ऐलान कर दिया।
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हजारों मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं, और यह संख्या आने वाले महीनों में लाखों तक जा सकती है।
📦 निर्यात पर असर
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वित्त वर्ष 2024 में भारत का अमेरिका को निर्यात: 77.5 बिलियन डॉलर
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अनुमानित नुकसान: 48 अरब डॉलर
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टैरिफ के कारण अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे और उनकी मांग तेजी से गिरेगी।
टैरिफ दरें (नई):
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झींगा मछली – 60%
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कार्पेट – 53%
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कपड़े – 59%
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हीरे व सोने के आभूषण – 52%
🚜 किसान और कपास संकट
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सरकार ने कपास पर 11% आयात शुल्क घटा दिया है।
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नतीजतन, भारतीय बाजार विदेशी कपास से भर जाएगा।
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कीमतों में 1100 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है।
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पहले से ही घाटे में चल रहे किसान अब और मुश्किल में हैं।
🌍 वैश्विक मंदी की आशंका
ट्रंप केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के खिलाफ टैरिफ युद्ध छेड़े हुए हैं। इससे वैश्विक आर्थिक मंदी की नई लहर शुरू हो सकती है और भारत के अन्य निर्यात बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं।
🏛 मोदी सरकार की मुश्किलें
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सरकार ने “स्वदेशी अपनाओ” का नारा फिर से दोहराया है, लेकिन जनता की कम क्रय शक्ति और महंगे भारतीय उत्पाद इस नारे को कमजोर बना देते हैं।
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घरेलू राजनीति में सरकार अंदर से चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार जैसी सहयोगी पार्टियों पर निर्भर है।
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विदेश नीति में संकट से निकलने के लिए मोदी सरकार रूस और चीन की ओर देख रही है।