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श्रावण का प्रथम सोमवार आज

 

सावन महीने में होंगे विभिन्न धार्मिक आयोजन

भगवान शिव को दूध चढ़ाने का है वैज्ञानिक आधार

कोविड गाइडलाइन का पालन करने पर मिलेगी श्रद्धालुओं को भोले के अभिषेक की इजाजत

रिपोर्टर – मनीष दवे

भीनमाल :- सावन यानि श्रावण का महीना आरंभ , सावन के महीने का शिवभक्तों को इंतजार रहता है.
इस वर्ष श्रावण मास रविवार से शुरू हुआ और 22 अगस्त को समाप्त होगा। इस आवण मास में 4 सोमवार आ रहे है जो 26 जुलाई, 2 अगस्त 9 व 16 अगस्त को है। पूरे मास और विशेषकर सोमवार को भगवान शिव के ऊपर दूध के अभिषेक से पुण्य लाभ तो मिलता है पर साथ ही यह जानना भी आवश्यक है कि भारत की ज्यादातर परम्पराओं और प्रथाओं के पीछे कोई न कोई कारण जरूर होता है, जिसकी वजह से वे परम्पराएं और प्रथाएं सदियों से चली आ रही है। शिवलिंग पर दूध चढ़ाना भी ऐसे ही एक वैज्ञानिक कारण से जुड़ा हुआ है। खासतौर पर सावन (श्रावण) के महीने में मौसम बदलने के कारण बहुत सी बीमारियां होने की संभावना रहती है, क्योंकि इस मौसम में वात-पित्त और कफ के सबसे ज्यादा असंतुलित होने की संभावना रहती है। ऐसे में दूध का सेवन करने से आप मौसमी और संक्रामक बीमारियों की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।

बीमारियों से बचने का आसान उपाय :

इसलिए सावन में दूध का कम से कम सेवन वात-पित्त और कफ की समस्या से बचने का सबसे आसान उपाय है। इसलिए पुराने समय में लोग सावन के महीने में दूध शिवलिंग पर चढ़ा देते थे। साथ ही सावन के मौसम में बारिश के कारण जगह-जगह कई तरह की घास-फूस भी उग आती है, जिसका सेवन मवेशी कर लेते है, लेकिन यह उनके दूध को जहरीला भी बना सकता है। ऐसे में इस मौसम में दूध के इस अवगुण को भी हरने के लिए एक बार फिर भोलेनाथ, शिवलिंग के रूप में समाधान बनकर सामने आते हैं और दूध को शिवलिंग पर अर्पित करके आम लोग मौसम की कई बीमारियों के साथ-साथ दूध के कई अवगुणों से ग्रसित होने से बच पाते हैं।

शिव ऊर्जा का प्रतीक

शिवलिंग शून्य, आकाश, अनंत ब्रह्मंड और निराकार परम पुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है। स्कंद पुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है। शिवलिंग वातावरण सहित भ्रमण करती धरती तथा संपूर्ण अनंत ब्रह्माण्ड की धुरी ही लिंग है, जिसका आदि और अंत नहीं है, उसे ही लिंग कहा गया है। ब्रह्माण्ड में दो ही चीजें है, ऊर्जा और पदार्थ हमारा शरीर पदार्थ से निर्मित है और आत्मा ऊर्जा है। इसी प्रकार शिव पदार्थ और शक्ति ऊर्जा का प्रतीक बन कर शिवलिंग कहलाते हैं।

ऊर्जा शिवलिंग में निहित

ब्रह्मण्ड में उपस्थित समस्त ठोस तथा ऊर्जा शिवलिंग में निहित हैं। वास्तव में शिवलिंग हमारे ब्रह्माण्ड की आकृति है। यह शिव- शक्ति अर्थात पुरुष और प्रकृति का समन्वय रूप है यानि इस संसार में न केवल पुरुष का और न केवल प्रकृति, स्त्री का वर्चस्व है, जबकि दोनों का समान है। योनि शब्द पर व्याख्या करें तो इसे मात्र जननेन्द्रिय समझना हमारी भूल होगी। संस्कृत में पुरुष और स्त्री दोनों के सम्मिलित रूप को मिलाकर मनुष्य योनि कहा गया है, इस प्रकार 84 लाख योनियां बताई गई है। कुल मिलाकर शिवलिंग का तात्पर्य प्रतीक से है, अर्थात पवित्रता का प्रतीक। दीपक की प्रतिमा बनाये जाने से इसकी शुरूआत हुई, बहुत से हठयोगी दीपशिखा पर ध्य लगाते हैं। हवा में दीपक की ज्योति स्थिर नहीं रह पाती है, इसलिए निर्विघ्न एकाग्रता के लिए विभिन्न प्रकार के धातु और पाषाण आदि से प्रतिमा बनाने का प्रचलन आरम्भ हुआ।

भगवान शिव के 19 अवतार

भगवान शिव के वीरभद्र, पिप्लाद, नंदी, भैरव, अश्वत्थामा, शरभ, गृहपति, दुर्वासा, हनुमान, वृषभ, यतिनाथ, कृष्ण दर्शन, अवधूत, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, किरात, सुनटनर्तक, ब्रह्मचारी व यक्ष अवतार हुए।

इस विधि से होता है लाभ

भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति, तिल से पापों का नाश, जौ से सुख में वृद्धि तथा गेहूं चढ़ाने से संतान की प्राप्ति होती है। जल से वृष्टि, कुशोदक से व्याधि शान्ति, इक्षुरस से श्री की प्राप्ति, दूध से पुत्र प्राप्ति, जलधारा से वर शान्ति, वंश वृद्धि के लिए धृतधारा, शर्करा युक्त दूध से जड़बुद्धि का विकास, सरसों के तेल से शत्रु नाश एवं मधु से राज्य प्राप्ति होती है।

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