मवई, अयोध्या: रमज़ान के पाक महीने का दूसरा अशरा बुधवार से शुरू हो गया है।
रमज़ान का दूसरा अशरा मग़फिरत का, अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को करता है माफ – मौलाना कामिल हुसैन नदवी
मंगलवार को पहले दस रोज़े पूरे हुए। इस्लाम में रमज़ान के 30 रोज़ों को तीन अशरों (हिस्सों) में बांटा गया है—पहला अशरा रहमत (अल्लाह की रहमत), दूसरा अशरा मगफिरत (गुनाहों की माफी) और तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात (आग से मुक्ति) के लिए माना जाता है।
मौलाना कामिल हुसैन नदवी ने दूसरे अशरे की अहमियत बताते हुए कहा कि यह मगफिरत (माफी) का दौर है। इन दस दिनों में अल्लाह अपने रोज़ेदार बंदों के बड़े से बड़े गुनाहों को माफ कर देता है। उन्होंने कहा कि हमें इस पाक महीने की फज़ीलत को समझना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी चाहिए।
रमज़ान में ज्यादा इबादत करने की नसीहत
मौलाना नदवी ने कहा कि मुसलमानों को रमज़ान के दौरान पांच वक्त की नमाज़ अदा करनी चाहिए, कुरआन पाक की तिलावत करनी चाहिए और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, “बेशक, अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ करने वाला और रहमत बरसाने वाला है।”
रोज़ा रखना फर्ज़, तौबा जरूरी
मौलाना नदवी ने बताया कि इस्लाम में रोज़ा रखना फर्ज़ है और यह सभी मुसलमानों के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस पाक महीने में अल्लाह से ज्यादा से ज्यादा तौबा करें, ताकि हमें बख्शीश का जरिया मिल सके।
उन्होंने यह भी दुआ की कि अल्लाह हम सबको प्यारे नबी के बताए रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमाए और रमज़ान के मुकद्दस महीने में हमारी इबादतों को कबूल करे। आमीन।
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(रिपोर्ट: मुदस्सिर हुसैन, IBN NEWS)