उद्देश्य किसानों को सूखे सीधे बीज वाले धान के फायदे और तकनीकी जानकारी से अवगत कराना
मीरजापुर। किसानक्राफ्ट द्वारा उत्तर प्रदेश के मीरजापुर के धोहा क्षेत्र में किसानों के लिए सूखे सीधी बुआई धान (Dry Direct Seeded Rice–DDSR) तकनीक का विशेष प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को सूखे सीधे बीज वाले धान के लाभ, कम लागत वाली खेती और कम पानी की खपत वाली तकनीक के बारे में शिक्षित करना था। कार्यक्रम 14 नवंबर को आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। —
सूखे सीधे बीज वाले धान के बड़े फायदे – पानी की बचत और लागत में भारी कमी
कार्यक्रम में बताया गया कि:
DDSR तकनीक से 50% तक कम पानी की आवश्यकता होती है।
जहां परंपरागत धान की 1 किलो उपज के लिए करीब 5000 लीटर पानी चाहिए, वहीं DDSR से सिर्फ 2000–2500 लीटर में उत्पादन संभव है।
इस तकनीक में नर्सरी, पोखरिंग, रोपाई और समतलीकरण की जरूरत नहीं होती।
फसल कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उगाई जा सकती है।
इससे मीथेन उत्सर्जन कम होता है, जो पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है।
फसल चक्रण और दालों, सब्जियों व तिलहनों के साथ सहफसलन संभव है। —
किसानक्राफ्ट ने विकसित की नई उन्नत DDSR तकनीक
कार्यक्रम में बोलते हुए किसानक्राफ्ट लिमिटेड के असिस्टेंट मैनेजर आलोक जैन ने कहा
“धान की खेती का भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है, लेकिन पानी की कमी और तकनीक की कमी से उत्पादन प्रभावित होने लगा है। इसी को देखते हुए किसानक्राफ्ट ने ड्राई डायरेक्ट सीडेड राइस की नई किस्में विकसित की हैं, जो समान उत्पादन के साथ 50% कम पानी की खपत करती हैं।”—
उपज बढ़ेगी, लागत घटेगी – विशेषज्ञों और किसानों की राय
प्रतीक कुमार (Better Life FPO) ने कहा कि सूखे सीधे बीज वाले धान से किसान मिट्टी की उर्वरता के अनुसार ज्यादा उपज प्राप्त कर सकते हैं और स्वाद भी पारंपरिक धान जैसा ही रहता है। इससे खेती की लागत में काफी कमी आती है।
किसान रीप चंद्र ने बताया:
> “इस तकनीक में नर्सरी और रोपाई जैसी मेहनत नहीं करनी पड़ती। कीटनाशकों की जरूरत भी कम होती है और मीथेन उत्सर्जन बेहद कम होता है।”
किसान अखिलेश सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लो-मीथेन धान के प्रचार के तहत DSR तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है, क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल और कम पानी वाली तकनीक है।—