शशांक तिवारी शहादत की खबर
शशांक तिवारी शहादत ने पूरे अयोध्या व प्रदेश को झकझोर दिया। भारतीय सेना के बहादुर लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी ने सिक्किम के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में एक बड़ी घटना के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने साथियों व स्थानीय नागरिकों की जान बचाने के प्रयास में शहादत प्राप्त की।
घटना का विवरण: सिक्किम में अदम्य साहस
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लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को एक आपातकालीन बचाव अभियान में तैनात किया गया था, जहाँ तेज ठंड और भूस्खलन की स्थिति थी।
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रेस्क्यू टीम के साथ आगे बढ़ते हुए उन्होंने जन-धड़कन से पूर्ण एक खाई में फंसे साथियों का पता लगाया और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का निर्देश दिया।
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इसी दौरान भारी हिमस्खलन में शशांक तिवारी घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हुए।
शशांक तिवारी का परिचय
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ग्राम सभा: मझवा, गद्दोपुर (अयोध्या जिला)
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शिक्षा: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से स्नातक; फिर नेशनल डिफेंस एकेडमी से पास-आउट
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सेना में प्रभाव: 2019 में कमीशन, उसके बाद विभिन्न सीमांत पहाड़ी अभियानों में सक्रिय भूमिका
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परिवार: माता-पिता एवं एक छोटा भाई–बहन; परिवार व गांव में उनका व्यक्तित्व लोक-सेवा के प्रति समर्पित था
पार्थिव शरीर का आगमन
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दिवंगत लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी का पार्थिव शरीर आज एयरक्राफ्ट द्वारा अयोध्या एयरपोर्ट पर लाया जाएगा।
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सुबह 10:30 बजे से प्रारंभिक सम्मान समारोह, तत्पश्चात राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा गांव गद्दोपुर को रवाना होगी।
राजकीय सम्मान और अंतिम संस्कार
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मुखाग्नि पूरे राजकीय व सैनिक सम्मान के साथ दी जाएगी।
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अयोध्या के सभी सरकारी अधिकारी एवं स्थानीय गणमान्य उपस्थित रहेंगे।
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परिजनों को सेना एवं राज्य सरकार द्वारा संतकोट, शहीद पेंशन व अन्य सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी।
श्रद्धांजलि संदेश
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने प्रेस नोट में कहा, “शशांक तिवारी ने अपने अदम्य साहस से देश का नाम रौशन किया। उनकी शहादत हमें सदैव प्रेरित करेगी।”
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रक्षा मंत्री ने ट्वीट कर कहा, “हमें अपने वीर सपूत पर गर्व है, शशांक का उदाहरण आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा के लिए प्रेरित करेगा।”
शहादत का संदेश
लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी शहादत हमें याद दिलाती है कि भारतीय सेना के पृथक-स्वयं बलिदान के बिना हमारी सीमाएँ सुरक्षित नहीं रह सकतीं। उनके इस सर्वोच्च बलिदान को हमेशा नमन रहेगा।