मवई, अयोध्या: रमजान का पवित्र महीना अपने आखिरी चरण में है और इस दौरान आने वाली शबे कद्र (लैलतुल कद्र) की रातें मुसलमानों के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, यह रात हजार महीनों की इबादत से भी अधिक फज़ीलत रखती है।
मौलाना शब्बीर नदवी ने बताया कि शबे कद्र की रात रमजान के आखिरी अशरे (तीसरे भाग) में आती है। यह रात बेहद पाक होती है क्योंकि इसी रात फरिश्ते जमीन पर उतरते हैं और रोजेदारों की दुआएं कबूल होती हैं। माना जाता है कि इसी रात हज़रत जिब्राइल (अलैहि सलाम) के जरिए पवित्र कुरान की पहली आयतें नाजिल हुई थीं। इसीलिए, यह रात रहमत, मगफिरत और नजात की रात मानी जाती है।
शबे कद्र की ताक रातें और उनकी फज़ीलत
शबे कद्र की सही तारीख निश्चित नहीं है, लेकिन इसे रमजान की 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं या 29वीं रात में से किसी एक में होने की संभावना बताई गई है। इन रातों में विशेष इबादत करने की सिफारिश की गई है।
मौलाना नदवी ने कहा कि इस रात में मुसलमानों को कुरान की तिलावत, नफिल नमाज अदा करने और अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
शबे कद्र की निशानियां:
1. इस रात मौसम न ज्यादा ठंडा होता है और न ज्यादा गर्म, बल्कि खुशनुमा रहता है।
2. आसमान साफ़ रहता है और रहमत की बारिश होने की संभावना रहती है।
3. सूरज की रोशनी नरम होती है और आंखों को चुभती नहीं।
क्या करें इस रात?
✔ गुनाहों से तौबा करें और अल्लाह से दुआ करें।
✔ पूरी रात इबादत, जिक्र और तिलावत में बिताएं।
✔ अपने माता-पिता और बुजुर्गों के लिए मगफिरत की दुआ करें।
✔ गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें।
मौलाना ने कहा कि शबे कद्र अल्लाह की रहमत लूटने का सुनहरा मौका है, इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह इस रात को जागकर इबादत करे और अपने गुनाहों की माफी मांगे।
रिपोर्ट: मुदस्सिर हुसैन, IBN NEWS
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