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अब हर लाभार्थी की बनेगी आभा आईडी

एक क्लिक पर मिलेगा मरीज के स्वास्थ्य का डेटा

चिकित्सक को मरीज की पूर्व की बीमारियां को जानने व इलाज में मिलेगी मदद

जिले में अब तक 4 लाख 71 हजार 932 लाभार्थियों की बन चुकी आभा आईडीIMG 20240703 WA0014

भीलवाडा, 03 जुलाई। प्रदेश में अब अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं डिजिटल हो रहीं है। सरकार की पहल पर अब किसी भी मरीज की पुरानी बीमारी जांच रिपोर्ट और दवाओं की जानकारी एक क्लिक पर सामने हो, इस उद्देश्य से जिले में मरीजों की आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउन्ट (आभा) आईडी बनाई जा रही है इस आईडी पर अब मरीजों की जिंदगी भर के उपचार की कुंडली बनाई जा रही है।

इससे व्यक्ति को अनावश्यक कागजात का रेकॉर्ड अपने पास नहीं रखना पड़ेगा। इसमें डॉक्टर्स को रिपोर्ट दिखाने से लेकर अन्य रिपोर्ट अपलोड कर सकते हैं। इसे एक क्लिक पर डाउनलोड किया जा सकता सकता है। जिले में अब तक 4 लाख 71 हजार 932 लाभार्थियों की आभा आईडी बनाई जा चुकी है।

 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. चेतेन्द्र पुरी गोस्वामी ने बताया कि केन्द्र सरकार ने आयुष्मान डिजिटल भारत मिशन की शुरुआत की है। इसके लिए मरीज का हैल्थ रिकॉर्ड ऑनलाइन अपडेट रखने के लिए आयुष्मान भारत अकाउंट (आभा) आईडी बनाई जा रही है। यह आईडी बनाने पर 14 अंकों का एक अकाउंट नम्बर अलॉट होगा, जिसमें संबंधित व्यक्ति ऐप के माध्यम से अपने चिकित्सा से संबंधित रिकॉर्ड, लैब रिपोर्ट, डॉक्टर का लिखा दवा का पर्चा, डॉक्टर नोट्स, इमेज, वैक्सीन आदि डिजिटल प्लेटफार्म पर सुरक्षित रख सकते हैं एवं आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक के साथ साझा भी कर सकते हैं।

स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों की ओर से आभा आईडी बनाई जा रही है। लाभार्थी स्वयं भी अपनी आभा आईडी बना सकता है। आईडी बनाने पर एक अकाउंट नम्बर अलॉट होगा, जिसमें संबंधित व्यक्ति ऐप के माध्यम से अपने चिकित्सा से संबंधित रेकॉर्ड, लैब रिपोर्ट, डॉक्टर का लिखा दवा का पर्चा, डॉक्टर नोट्स, इमेज, वैक्सीन इत्यादि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रख सकते हैं।

 

नही रखनी होगी साथ में पुरानी रिपोर्ट्स –

 

सीएमएचओ डॉ. गोस्वामी ने बताया कि हैल्थ अकाउंट बनाने से उसमें रिकॉर्ड का संधारण करने का फायदा मिलेगा। अक्सर देखते हैं कि मरीज डॉक्टर के पास पहुंचता है। डॉक्टर उससे बीमारी के बारे में जानकारी लेता है।

पूर्व की जांच रिपोर्ट मांगता है, लेकिन उनका रिकॉर्ड नहीं होने से दिक्कत आती है। ऐसे दुबारा सारी रिपोर्ट आने के बाद उपचार में शुरू होता है। पुराना रिकॉर्ड रहे, तो डॉक्टर को बीमारी के इलाज में बड़ी मदद मिलती है। स्वास्थ्य विभाग के कार्मिक आभा आईडी बना रहे हैं। लाभार्थी स्वयं भी अपनी आभा आईडी बना सकता है।

यह अकाउंट मोबाइल में भी आराम से जनरेट हो जाएगा। इसके लिए व्यक्ति को अपने मोबाइल में प्ले स्टोर पर जाना होगा। वहां से इसे डाउनलोड कर सकते हैं।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत सभी निजी और सरकारी डायग्नोस्टिक लैब को एबीडीएम कम्प्लायंट लैब मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इससे मरीज कहीं भी इलाज कराए, उसकी मेडिकल हिस्ट्री उसके आभा अकाउंट पर आसानी से मिल जाएगी।

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