बी.आर. मुराद IBN NEWS, फरीदाबाद।
फरीदाबाद के अनंगपुर गांव में हाल ही में हुई तोड़फोड़ की घटनाओं को लेकर ग्रामीणों और गुर्जर समाज में भारी आक्रोश है। शुक्रवार को अनंगपुर स्थित कांत एनक्लेव में जयवीर भड़ाना के निवास पर एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें फरीदाबाद, गुड़गांव, नोएडा और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख गुर्जर नेता मौजूद रहे।
🗣️ बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय प्रताप सिंह ने की
बैठक की अध्यक्षता बड़खल विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे चौ. विजय प्रताप सिंह ने की। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि:
“अनंगपुर गांव 1500 वर्ष पुराना है और सूरजकुंड मेले के कारण अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है। मगर भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य पेश कर पहले फार्महाउस और बैंक्वेट हॉल, फिर गांववासियों के घरों पर जेसीबी चलवा दी। ये पूरी तरह बदनीयती से की गई कार्रवाई है।”
🔥 केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर पर लगाया आरोप
विजय प्रताप सिंह ने भाजपा के केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक महीने पहले उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि तोड़फोड़ नहीं होगी। लेकिन इसके बावजूद जेसीबी फिर से भेज दी गई और लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही मकानों को गिरा दिया गया।
🗓️ 13 जुलाई को होगी राष्ट्रीय महापंचायत
उन्होंने ऐलान किया कि 13 जुलाई 2025, रविवार को गांव अनंगपुर में एक विशाल राष्ट्रीय महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। इसमें देशभर के गुर्जर समाज के प्रतिनिधि, किसान संगठनों के नेता और कांग्रेस के बड़े नेता शामिल होंगे। यह पंचायत सरकार की नीतियों के खिलाफ एक नई दिशा में आंदोलन का संकेत होगी।
“सरकार ने अपने सभी रास्ते बंद कर लिए हैं। अब आंदोलन का नया चरण शुरू हो चुका है और हम डरने वाले नहीं हैं।” – विजय प्रताप सिंह
👥 इन नेताओं ने भी रखे अपने विचार:
सभा में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान से आए कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। इनमें प्रमुख नाम रहे:
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विरजेश भाटी,
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डॉ. जतन,
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विकाश भाटी,
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आलोक नागर,
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रोहताश बेदी,
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विजय खटाना पार्षद, सोहना,
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उमेश पंडित (वरिष्ठ कांग्रेस नेता),
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नेपाल कसाना,
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दिवाकर बिधूड़ी,
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लोकेश भाटी,
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तपेंद्र भड़ाना,
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सतीश भड़ाना,
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विजयपाल सरपंच,
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राज कुमार भड़ाना,
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जयवीर भड़ाना,
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किसान मोर्चा के युवा अध्यक्ष एवं प्रवक्ता (यूपी)
आदि।
📍 पृष्ठभूमि: क्या है विवाद?
अनंगपुर गांव में चल रही तोड़फोड़ की कार्यवाही को लेकर स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें बिना सूचना, नोटिस और समय दिए घरों से बेदखल किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में पेश तथ्यों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। गांववासी इसे राजनीतिक बदले और अवैध दबाव की कार्रवाई मान रहे हैं।