रिपोर्ट: मुदस्सिर हुसैन | IBN NEWS
मवई (अयोध्या):
“मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।”
यह पंक्तियाँ सही मायनों में नेवरा गांव के समाजसेवी मुबस्सिर हुसैन खां के जीवन पर सटीक बैठती हैं।
🏡 जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
मुबस्सिर हुसैन का जन्म 1942 ई. में जनपद अयोध्या की ब्लॉक मवई के कस्बा नेवरा स्थित एक प्रतिष्ठित तालुकदार परिवार में हुआ था। हालांकि वह उच्च कुल में जन्मे, पर उनका जीवन सादा, संघर्षमयी और जनकल्याण को समर्पित रहा।
✊ संघर्षों भरा जीवन
मुबस्सिर हुसैन की 45 वर्ष की अल्प आयु में ही सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में जो योगदान रहा, वह प्रेरणादायक है। उन्होंने हर परिस्थिति में संघर्ष को स्वीकारा, कभी हार नहीं मानी और लोगों की सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।
🧠 शिक्षा और सादगी
उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने किसी सरकारी या निजी नौकरी की ओर रुख न करते हुए समाज सेवा को अपना मिशन बना लिया। उनका जीवन बहुत सादा और नैतिक मूल्यों से युक्त रहा।
🤝 समाजसेवा में समर्पण
मुबस्सिर हुसैन ने अपने गांव, क्षेत्र और समाज के दुख-दर्द में हमेशा साथ दिया। लोगों की मदद करना, उन्हें प्रगति की दिशा दिखाना, और मोहब्बत का पैगाम देना उनका जीवन दर्शन था। वे कहते थे – “लोगों से मिली मोहब्बत ही मेरी असली पूंजी है।”
🗳️ राजनीतिक सफर
राजनीतिक क्षेत्र में भी वह एक चमकते सितारे के रूप में उभरे। जनसेवा और ईमानदारी उनकी पहचान थी। हालांकि उन्होंने किसी बड़े पद की लालसा नहीं की, परंतु लोगों के दिलों में उनकी छवि एक जनप्रिय नेता और सच्चे समाजसेवक की बन गई।
🕊️ अलविदा और विरासत
मुबस्सिर हुसैन ने 4 अक्टूबर 1991 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन उनका व्यक्तित्व और सिद्धांत आज भी जीवित हैं। उनके दो पुत्र – दानिश और नाजिश, पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए समाजसेवा में सक्रिय हैं।
दानिश और नाजिश का कहना है –
“हमारे पिता ने हमें सिखाया कि लोगों की सेवा ही असली सुकून है। हम उसी राह पर चलने का प्रयास कर रहे हैं।”