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झाँसी – पृथक बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन शुरू

ब्यूरो चीफ झाँसी।
झाँसी 19 सितम्बर। पृथक बुन्देलखंड राज्य निर्माण की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इस मांग को लेकर झांसी में संयुक्त बुन्देलखंड निर्माण मोर्चा के तत्वाधान में राज्य समर्थकों ने अनिश्चित कालीन सामूहिक सत्याग्रह आंदोलन शुरु कर दिया है।
अनिश्चित कालीन सामूहिक सत्याग्रह आंदोलन में बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण सेना के नेतृत्व में बैठे सेना के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बुन्देलखण्ड को राज्य सरकार व केन्द्र सरकार द्वारा उपेक्षित बुन्देलखण्ड करार दिया। उन्होने कहा कि बुन्देलखण्ड को उमा भारती से लेकर पीएम मोदी द्वारा छला गया है। अगर 2019 तक राज्य का निर्माण नही होता तो बीजेपी को केन्द्र में आना मुश्किल होगा। इसी क्रम में बुन्देलखण्ड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय एवं बुन्देलखण्ड क्रान्ति दल के अध्यक्ष सतेन्द्र पाल ने कहा कि जब तक बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण नही हो जाता तब तक हम सभी आराम से न ही बैठेंगे और न ही बैठने देगें। उन्होंने कहा कि यह सत्याग्रह अभी झांसी से शुरू हुआ है आगे चलकर इसकी धमक समस्त बुन्देलखण्ड में सुनाई देगी।बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा के कार्यवाहक अध्यक्ष बाबूलाल तिवारी एवं महासचिव निदेश भार्गव ने कहा कि बुन्देलखण्ड के समस्त लोगों से अपील है कि अब सभी एक हो जाये और पार्टी लाइन से ऊपर उठकर बुंदेलखंड राज्य निर्माण का समर्थन करें।सत्याग्रह स्थल पर नरेश सोनी, रघुराज शर्मा, हमीदा अंजुम, देवी सिंह कुशवाहा, उत्कर्ष साहू सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी क्षेत्र झांसी की चुनावी रैली में स्थानीय सांसद उमा भारती ने अपने भाषण के दौरान बुंदेलखंड की जनता से वादा किया था कि अगर केन्द्र में भाजापा की सरकार आई तो दो वर्ष के भीतर प्रथक बुंदेलखंड राज्य बना दिया जाएगा। लेकिन इस संबंध मे अब तक कोई अपेक्षित कार्यवाही नहीं की गई।2011 की जनगणना के अनुसार पूरे बुंदेलखंड की जनसंख्या एक करोड़ तेरह लाख चौतीस हजार सात सौ तिरेपन है। बुंदेलखंड के पास 70592 वर्ग किलो मीटर भूमि है यदि उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के तेरह जिलो को मिलाकर बुंदेलखंड राज्य बना तो अपनी जनसंख्या के अनुसार 19 वां और क्षेत्रफल के अनुसार देश का 18 बे नंबर का राज्य बुंदेलखंड होगा। जैसा कि आप जानते है कि बुंदेलखंड राज्य निर्माण की लड़ाई बहुत समय से लड़ी जा रही है आजादी के बाद 12 मार्च 1948 को विंध्य प्रदेश के अंतर्गत बुंदेलखंड राज्य बनाया गया था और राज्य के पहले मुख्यमंत्री श्री कामता प्रसाद सक्सेना बने। एक नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश का निर्माण किया गया तथा बुंदेलखंड राज्य समाप्त कर बुंदेलखंड क्षेत्र को दो भागों में विभाजित कर उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में बांट दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार सात जिलो में झांसी जालौन ललितपुर बांदा कर्वी हमीरपुर व महोबा को बुंदेलखंड क्षेत्र मानती है। मध्य प्रदेश सरकार छै जिलों सागर पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ व दतिया को बुन्देलखंड मानती है केंद्र सरकार इन 13 जिलो को बुंदेलखंड क्षेत्र मानकर बुंदेलखंड पैकेज देती है इस प्रकार से बुंदेलखंड का क्षेत्र को लेकर कोई विवाद नहीं है। पूरे देश में उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में बुंदेलखंड सर्वाधिक पिछड़ा हुआ क्षेत्र है। बुंदेलखंड के सारे किसान मजदूर व्यापारी नौजवान वह छात्र परेशान है बुंदेलखंड क्षेत्र का विकास केवल पृथक राज्य बुंदेलखंड राज्य निर्माण से ही संभव है।
रिपोर्ट – महेन्द्र सिंह सोलंकी।

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