फरीदाबाद से बी.आर. मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद: हर साल 17 अप्रैल को ‘विश्व हीमोफीलिया दिवस’ मनाया जाता है, ताकि इस गंभीर बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाई जा सके। इस अवसर पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स फरीदाबाद के विशेषज्ञ डॉक्टर मीत कुमार, प्रोग्राम क्लिनिकल डायरेक्टर एवं एचओडी – हेमेटो ऑन्कोलॉजी एंड बोन मैरो ट्रांसप्लांट ने इस रोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
🧬 क्या है हीमोफीलिया?
डॉ. मीत कुमार ने बताया कि हीमोफीलिया एक अनुवांशिक रोग है, जिसमें खून का थक्का बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे शरीर में मामूली चोट या कट लगने पर भी खून बहता रहता है और जल्दी नहीं रुकता। यह समस्या शरीर में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी के कारण होती है, जो खून को थक्के में बदलने में मदद करता है।
🔍 इसके कारण क्या हैं?
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अनुवांशिकता
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कैंसर या मल्टीपल स्क्लेरोसिस
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ऑटोइम्यून रोग
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प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव
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दवाओं की प्रतिक्रिया
👨⚕️ हीमोफीलिया के प्रकार
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हीमोफीलिया ए: फैक्टर 8 की कमी
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हीमोफीलिया बी: फैक्टर 9 की कमी
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हीमोफीलिया सी: फैक्टर 11 की कमी
⚠️ किन लक्षणों को न करें नजरअंदाज?
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नाक से बार-बार खून बहना
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मसूड़ों से खून आना
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मल, पेशाब या उल्टी में खून दिखाई देना
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चोट लगने पर खून रुकने में देर
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सिरदर्द, उल्टी या दौरे (ब्रेन ब्लीडिंग की स्थिति में)
💉 उपचार और सावधानियां
हीमोफीलिया का इलाज आमतौर पर खून में क्लॉटिंग फैक्टर की पूर्ति करके किया जाता है।
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जरूरत पड़ने पर मरीज को ब्लड या प्लाज्मा चढ़ाया जाता है।
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इंजेक्शन के जरिए क्लॉटिंग फैक्टर दिया जाता है।
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मरीज को सावधानीपूर्वक जीवनशैली अपनानी चाहिए।
📋 जरूरी सलाह
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बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें, विशेषकर NSAIDs
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नियमित व्यायाम करें, गिरने या चोट लगने से बचें
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हेपेटाइटिस A और B का वैक्सीनेशन कराएं
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समय-समय पर चेकअप कराएं
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दांतों की सफाई पर विशेष ध्यान दें