राकेश पाण्डेय, गाज़ीपुर
गाज़ीपुर: विकलांग भाजपा कार्यकर्ता स्व. सियाराम उपाध्याय की पुलिस लाठीचार्ज में घायल होने के बाद हुई मौत को लेकर गाज़ीपुर में आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार 16 सितंबर को छात्र नेताओं व नागरिकों ने सरयू पांडेय पार्क से जुलूस निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया और जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सियाराम की मौत के ज़िम्मेदार पुलिसकर्मियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और मौजूदा पुलिस अधीक्षक को बर्खास्त किया जाए।
✍️ राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
छात्रों ने डीएम कार्यालय पर अल्पकालिक सभा के बाद जिलाधिकारी के प्रतिनिधि सीआरओ आयुष चौधरी के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि सियाराम की हत्या में शामिल पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही मृतक के वृद्ध माता-पिता को जीवनयापन के लिए 50 लाख रुपये का मुआवज़ा देने की अपील की गई।
🚨 छात्रों का आरोप – हाउस अरेस्ट और दमन
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस ने कई नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया। पूर्व उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय और पूर्व महामंत्री सुधांशु तिवारी को सुबह से ही नज़रबंद कर दिया गया और उनके मोबाइल से जबरन कार्यक्रम स्थगित होने की फर्जी सूचना सोशल मीडिया पर प्रसारित कराई गई।
📢 छात्रों की प्रमुख मांगें
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सियाराम की हत्या करने वाले पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
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आरोपी पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।
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मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिले।
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मौजूदा पुलिस अधीक्षक को तत्काल हटाया जाए।
✊ प्रदर्शन में शामिल छात्र नेता और नागरिक
प्रदर्शन में शम्मी सिंह, शशांक उपाध्याय, अभिषेक कुमार राय, शिवम उपाध्याय, दिवंशु पाण्डेय, सतीश उपाध्याय, डॉ. समीर सिंह, शिवम सिंह, अश्वनी राय, ओजस्व शाहू, मोनू तिवारी, ओम प्रकाश पाण्डेय, पवन सिंह, रुद्रमणि त्रिपाठी, संजीत जायसवाल, अमित राय, प्रकाश राय, दिनेश सिंह, सुमित तिवारी, अतुल तिवारी समेत दर्जनों छात्र नेता और नागरिक मौजूद रहे।
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल गाजीपुर में इस घटना के बाद कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।