राकेश की रिपोर्ट | टीम IBN न्यूज़
गाजीपुर: शहर के हृदयस्थल गोराबाजार में स्थित जिला चिकित्सालय को स्थानांतरित करने के बाद यहां निर्मित महिला अस्पताल अब गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए वरदान बनता जा रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों महिलाएं इलाज के लिए पहुँच रही हैं, जिनमें अधिकांश जिले के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों से हैं।
सरकार की योजना से बढ़ी उम्मीदें
सरकार की ‘स्वास्थ्य सबके लिए’ नीति के तहत यह अस्पताल मेडिकल कॉलेज के संचालन में चल रहा है, जहां चिकित्सक समय से पहुंचकर मरीजों को मुफ्त दवाइयाँ और जाँच सेवाएं दे रहे हैं। इससे गरीब वर्ग को राहत मिली है और वे बिना आर्थिक बोझ के इलाज करा पा रहे हैं।
दलालों को लग रही है चोट
लेकिन जिस बदलाव से गरीब मरीजों की बल्ले-बल्ले हो रही है, उसी से स्वास्थ्य माफिया परेशान हो उठे हैं। पिछले तीन दशकों से अस्पताल के सामने जमे मेडिकल स्टोर और डायग्नोसिस सेंटर्स का कारोबार अब बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
चर्चित महिला चिकित्सिका पर गंभीर आरोप
अस्पताल के आयुर्वेद विभाग में कार्यरत एक चर्चित महिला चिकित्सिका पर आरोप है कि वह निजी मेडिकल संचालकों के दलालों के साथ सांठगांठ कर रही हैं। आरोपों के अनुसार, यह दलाल मरीजों को चिकित्सिका के पास ले जाते हैं, जो मरीजों की जांच के पर्चे ऐसी लैब्स में भेजती हैं जहां से उन्हें मोटा कमीशन मिलता है।
जांच मशीनें होते हुए भी निजी लैब की पैरवी
यह विडंबना है कि अस्पताल में हर जरूरी जांच की मशीन उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को निजी लैब्स में भेजा जा रहा है। इससे मरीजों को जहां पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं दलाल और चिकित्सिका को फायदा हो रहा है।
अस्पताल गेट बना दलालों का अड्डा
सुबह 7 बजे से ही अस्पताल के गेट पर दाईयों और महिला दलालों का जमावड़ा लग जाता है। ये महिलाएं आने वाली मरीजों को फुसलाकर या भ्रमित कर उन्हें निजी मेडिकल स्टोर्स और लैब्स की ओर मोड़ देती हैं। ऐसे में सरकारी व्यवस्था कमजोर होती दिखाई देती है।
मारपीट और पुलिस कार्रवाई भी बेअसर
पिछले सप्ताह दो महिला दलालों के बीच गेट पर ही मारपीट हो गई थी, जिसकी रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज हुई। लेकिन कुछ दिन बाद मामला शांत हो गया और दलाल फिर सक्रिय हो गए।
प्रशासन की सीमित कामयाबी
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य आनंद मिश्रा ने अस्पताल में गार्डों की तैनाती करवाई है, जिससे कुछ हद तक उधमी तत्वों और दबंगों पर अंकुश लगा है। लेकिन महिला व पुरुष दलालों की घुसपैठ अब भी बनी हुई है।