✨ फरीदाबाद: बी.आर. मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद शहर में ईद-उल-जुहा (बकरीद) का पर्व पूरे अमन और भाईचारे के साथ मनाया गया। शहर की सभी मस्जिदों में हजारों की संख्या में नमाजियों ने सुबह की नमाज अदा की और एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी।

मरकज मस्जिद ईदगाह (ओल्ड फरीदाबाद) में मुफ्ती इकरार कासमी ने तकरीर करते हुए कहा:
“हमें अपने मुल्क की तरक्की और अमन के लिए दुआ करनी चाहिए। साथ ही सरकार के आदेशों का पालन करना हर नागरिक का फर्ज़ है।”
इसके बाद नमाज अदा की गई और लोगों ने गले मिलकर एक-दूसरे को ईद उल अजहा की बधाई दी।
🕌 अन्य मस्जिदों में हुईं तकरीरें और नमाज
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बाबा नूरुद्दीन की दरगाह:
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पहली नमाज: 6:35 बजे
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दूसरी नमाज: 7:40 बजे (हाफिज़ आलम द्वारा पढ़ाई गई)
हाफिज आलम ने अपने संबोधन में कहा कि:
“ईद-उल-जुहा केवल जानवरों की कुर्बानी का त्योहार नहीं है, बल्कि बुराई, घमंड और ज़िद्द की कुर्बानी का दिन भी है।”
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ऊँचा गांव जामा मस्जिद, बल्लभगढ़:
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नमाज का समय: 7:15 बजे
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स्थानीय निवासियों ने पार्किंग और अन्य सुविधाओं का बेहतरीन प्रबंध किया।
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🤝 सामाजिक व धार्मिक नेताओं की मौजूदगी
इस मौके पर कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे जिन्होंने शहरवासियों को बकरीद की शुभकामनाएं दीं:
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शेर खान मलिक (प्रधान)
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बाबू खान सिद्दीकी
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नर सिंह आधाना
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प्रेम सिंह आधाना
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सतीश आधाना
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प्रो. जोर मसीह
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सरदार हरबंस सिंह सेठी
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राजेंद्र सिंह
📢 समाप्ति संदेश
फरीदाबाद में बकरीद इस वर्ष शांति, सौहार्द और एकता का प्रतीक बनकर उभरा। धार्मिक नेताओं की अपील के बाद समाज में सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पर्व को मनाया गया। यह त्यौहार सही मायनों में कुर्बानी की भावना और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक बन गया।

