फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद:बल्लभगढ़ स्थित ऊंचा गांव की जामा मस्जिद में ईदुल-फित्र की नमाज इस साल गैर मामूली जोश व खरोश और अकीदत के साथ अदा की गई,जहां हर साल के मुकाबले में कहीं ज़्यादा भीड़ देखने में आई। इस मौके पर न सिर्फ मुसलमानान-ए-इलाका बड़ी तादाद में शरीक हुए बल्कि शहर और गांव के हिंदू भाइयों ने भी मस्जिद पहुंच कर अपने मुस्लिम भाइयों को दिल की गहराइयों से ईद की मुबारकबाद पेश की।
जिस ने गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर पेश की।नमाज़-ए-ईद की इमामत मौलाना जमालुद्दीन ने फरमाई, जिन्होंने अपने खिताब और दुआ में मुल्क-ए-हिंदुस्तान की सलामती,तरक्की,खुशहाली,अमन व शांति और बाहमी भाईचारे के फरोग के लिए खुसूसी दुआएं कीं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा दौर में जबकि बाज मकामात जैसे उत्तम नगर और दीगर इलाकों में नफरत का माहौल पैदा किया जा रहा है,ऐसे में ऊंचा गांव का हिंदू मुस्लिम इत्तेहाद एक मिसाली नमूना है जो पूरे मुल्क के लिए काबिले तकलीद है। इस मौके पर इंतजामिया और मकामी पुलिस के साथ साथ गाव के हिंदू भाइयों का तआवुन भी काबिले सताइश रहा।
चारों अतराफ के रास्ते खुले रखे गए और नमाजियों की सहूलत के लिए बेहतरीन इंतज़ामात किए गए। खुसूसन हिंदू भाइयों ने अपनी जाती जगहें पार्किंग के लिए फराहम कीं और वुजू के लिए पानी का इंतज़ाम भी किया। जिस पर नमाज़ के बाद हर तरफ उन के इस नेक अमल की सताइश की गई।
गांव की मारूफ शख्सियत प्रेम सिंह अधाना ने इस मौके पर अपने ख़यालात का इज़हार करते हुए कहा कि नफरत फैलाने वाले अनासिर दरअसल कम फ़हम होते हैं जबकि हमारे गांव में बुजुर्गों और नौजवानों के दरमियान कोई तफरीक नहीं पाई जाती। उन्होंने कहा कि होली,दिवाली, ईद-उल-फित्र और ईद-उल-अजहा जैसे तमाम त्यौहार मोहब्बत व उख़ुव्वत और भाईचारे का पैगाम देते हैं,जिन्हें मिल जुल कर मनाना वक्त की अहम जरूरत है।
मस्जिद कमेटी के जिम्मेदारान शेर खान मलिक प्रधान,इलियास मलिक,बाबू खान सिद्दीकी,महमूद खान और शौकत खान सैफी ने मौलाना जमालुद्दीन (जिला सदर जमीयत उलेमा फरीदाबाद) के हमराह हिंदू भाइयों का दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने इस उम्मीद का इज़हार किया कि ऊंचा गांव का यह इत्तेहाद पूरे हिंदुस्तान के लिए एक मिसाल बनेगा।
पार्किंग और दीगर इंतजामात में नुमाया किरदार अदा करने वाले मास्टर सुनील अधाना,नरसिंह अधाना,डॉक्टर श्याम वीर और विनोद अधाना को भी खुसूसी तौर पर सराहा गया और उन के लिए लंबी उम्र और घरेलू खुशहाली की दुआएं की गईं।
विनोद अधाना ने इस मौक़े पर कहा कि हमारे गांव में प्यार व मोहब्बत और भाईचारे की रिवायत सदियों पुरानी है जिसे नई नस्ल तक मुन्तक़िल करना हम सब की जिम्मेदारी है।
मजीद बरआं,यह बात भी बाइस-ए-मसर्रत रही कि नौजवानों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और सड़कों पर खड़े हो कर ईद के मौक़े पर लोगों की खिदमत अंजाम दी।
नमाज़ के इख्तियार पर एक बार फिर मौलाना जमालुद्दीन ने मुल्क व मिल्लत की सलामती,खुशहाली और तरक्की के लिए इज्तिमाई दुआ कराई। यूं जामा मस्जिद ऊंचा गांव में मनाई गई ईदुल-फित्र न सिर्फ एक मजहबी फर्ज की अदायगी का मज़हर बनी बल्कि बाहमी इत्तेहाद,रवादारी और कौमी यक-जहती की एक जिंदा मिसाल भी साबित हुई।