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डीपीएस ग्रेटर फरीदाबाद में एआई कार्यशाला के दौरान शिक्षक और विशेषज्ञ

डीपीएस ग्रेटर फरीदाबाद में कक्षाओं में एआई की भूमिका पर कार्यशाला का आयोजन

फरीदाबाद से बी.आर. मुराद की रिपोर्ट

फरीदाबाद: डीपीएस ग्रेटर फरीदाबाद में “दैनिक कक्षाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)” के प्रभाव पर एक जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सीबीएसई (CBSE) के दिशा-निर्देशों के तहत एसटीईएम विचार-विमर्श (District Level Discussion – DLD) के रूप में संपन्न हुआ, जिसमें जिले के विभिन्न स्कूलों से आए शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यशाला की शुरुआत स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. बिंदु शर्मा ने विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में अतिथियों के साथ पौधारोपण कर की। इस अवसर पर पर्यावरण को स्वच्छ और संरक्षित रखने की शपथ दिलाई गई, जिससे कार्यशाला का उद्देश्य केवल तकनीकी न होकर सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को भी समाहित करता नजर आया।

शिक्षा में एआई का समावेश

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य यह था कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कक्षा की दैनिक शिक्षण प्रक्रियाओं में प्रभावी ढंग से शामिल किया जा सकता है। प्रतिभागी शिक्षकों को विभिन्न एआई आधारित टूल्स और तकनीकों के उपयोग से अवगत कराया गया, जो छात्रों की सीखने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं।

कार्यशाला की मुख्य वक्ता सीबीएसई की अधिकृत संसाधन व्यक्ति, मीनू कुमार, जो एक एआई फैसिलिटेटर और लेखिका भी हैं, उन्होंने सत्र की शुरुआत एक प्रेरक भाषण और लाइव प्रेजेंटेशन से की। उन्होंने बताया कि आज के डिजिटल युग में एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि शिक्षा के भविष्य की दिशा है।

शैक्षिक चैटबॉट निर्माण की विशेष ट्रेनिंग

कार्यशाला की सबसे प्रमुख विशेषता रही — शिक्षकों को स्वयं के शैक्षिक चैटबॉट (Educational Chatbots) तैयार करने की ट्रेनिंग देना। इस सत्र का नेतृत्व किया ज़ोफ़्टवेयर कंपनी के CTO और सह-संस्थापक आकाश दुबे और CCO (मुख्य ग्राहक अनुभव अधिकारी) मोनिका सिक्का ने। उन्होंने प्रतिभागियों को लाइव डेमो के माध्यम से यह सिखाया कि किस तरह से एक एआई आधारित चैटबॉट छात्रों के संदेहों को दूर कर सकता है, और उन्हें होमवर्क में भी गाइड कर सकता है।

शिक्षकों को मिला नया दृष्टिकोण

शिक्षकों ने कार्यशाला में कई उन्नत टूल्स जैसे कि AI ट्यूटर, Doubt-Solver बॉट्स और कस्टम लर्निंग असिस्टेंट्स को समझा और उन्हें व्यावहारिक तौर पर प्रयोग करना सीखा। शिक्षकों का कहना था कि इस प्रकार की कार्यशालाएं न केवल नई तकनीक से परिचय कराती हैं, बल्कि शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक और संवादात्मक भी बनाती हैं।

विद्यालय प्रबंधन का सराहनीय प्रयास

डीपीएस ग्रेटर फरीदाबाद की प्रिंसिपल डॉ. बिंदु शर्मा ने कार्यशाला के समापन पर सभी अतिथियों और प्रतिभागियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि,
“शिक्षा का भविष्य डिजिटल और एआई की दिशा में अग्रसर है, और इस बदलाव को अपनाना ही शिक्षकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। हम अपने विद्यालय में इस प्रकार की नवाचार पूर्ण कार्यशालाएं निरंतर आयोजित करते रहेंगे।”

पर्यावरण और तकनीक का सुंदर संगम

विश्व पर्यावरण दिवस के दिन यह कार्यशाला एक सकारात्मक संदेश भी दे गई — कि चाहे हम तकनीकी क्षेत्र में जितनी भी प्रगति करें, प्रकृति और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। कार्यशाला के दौरान लगाए गए पौधे भविष्य की उस हरित सोच के प्रतीक हैं जिसमें तकनीक और प्रकृति दोनों का समान योगदान है।

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