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बलिया में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर गोष्ठी और प्रदर्शनी आयोजित

बलिया में आपातकाल के 50 वर्षों की स्मृति में गोष्ठी एवं प्रदर्शनी, लोकतंत्र रक्षकों का हुआ सम्मान

बलिया देश के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्याय — आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर बलिया नगर स्थित अग्रवाल धर्मशाला में बुधवार को एक गोष्ठी एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मंत्री ने आपातकाल को बताया लोकतंत्र पर काला धब्बा

गोष्ठी को संबोधित करते हुए मंत्री दयाशंकर मिश्र ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को लोकतंत्र पर “काला धब्बा” करार दिया। उन्होंने कहा—

“इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रता को कुचल दिया गया। हजारों निर्दोष लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया। प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और जो कोई भी कांग्रेस या इंदिरा गांधी के खिलाफ बोलता था, उसे जेल में डाल दिया जाता था।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाजपा आज के दौर में स्वतंत्र मीडिया और नागरिक अधिकारों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि,

“जब भी प्रधानमंत्री परिवार से बाहर हुआ, तब भी सुपर पीएम का नियंत्रण परिवार के पास रहा।”


वृक्षारोपण से दी लोकतंत्र को हरियाली की प्रेरणा

गोष्ठी से पूर्व नगर के शहीद पार्क में मंत्री दयालु मिश्र द्वारा वृक्षारोपण कर लोकतंत्र की मजबूती और हरियाली का प्रतीकात्मक संदेश भी दिया गया।


ऐतिहासिक संदर्भ और तथ्य

गोष्ठी में पूर्व सांसद भरत सिंह ने आपातकाल का इतिहास बताते हुए कहा कि 25 जून 1975 को राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल घोषित किया गया था, जो 21 मार्च 1977 तक चला।
इस दौरान 1 लाख से अधिक राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को कैद कर लिया गया था।
उन्होंने कहा कि संजय गांधी ने उस समय नसबंदी अभियान चलाया, जिसने कई परिवारों को पीड़ा दी।


चंद्रशेखर जी का साहसिक विरोध

राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने उन दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने कांग्रेस में रहते हुए आपातकाल का विरोध किया।

“19 महीने तक पिताजी जेल में रहे, हमारे घर कोई मिलने तक नहीं आता था। वह समय भयावह था।”


प्रदर्शनी में उभरी पीड़ा की छवियाँ

अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित प्रदर्शनी में आपातकाल के समय हुई यातनाओं से जुड़ी पोस्टरों और दस्तावेज़ों की झलकियां लगाई गईं। प्रदर्शनी का उद्घाटन मंत्री दयालु मिश्र ने किया।

इन पोस्टरों में दर्शाया गया कि कैसे लोकतंत्र को कुचला गया और नागरिकों को अमानवीय स्थितियों में रखा गया।


लोकतंत्र रक्षक सेनानियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में लोकतंत्र रक्षक सेनानी:

  • गोपाल सिंह

  • देवेन्द्र त्रिपाठी

  • सुनिल बहादुर सिंह

  • ऋषि राज सिंह
    सहित कुल 18 लोकतंत्र रक्षकों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मंत्री राजधारी सिंह ने की, जबकि संचालन पूर्व महामंत्री सुरजीत सिंह परमार ने किया।


प्रमुख उपस्थिति

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग:

पूर्व विधायक शिवशंकर चौहानआपातकाल50वर्ष 

  • विजय बहादुर सिंह, विनोद शंकर दूबे, जयप्रकाश साहू

  • अमिताभ उपाध्याय, धर्मेंद्र सिंह, डा. धर्मेंद्र सिंह, राजीव मोहन चौधरी, अशोक यादव, स्वेता राय, नितेश मिश्रा, सोनी तिवारी, संध्या पाण्डेय सहित कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता।

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