अयोध्या, – अयोध्या मंडल कारागार में उस समय हड़कंप मच गया जब महिला आरक्षी शांति यादव का शव उनके आवासीय परिसर में फंदे से लटका मिला। यह मामला संदिग्ध मौत का रूप लेता जा रहा है, जिस पर पुलिस और जेल प्रशासन दोनों स्तरों पर जांच चल रही है।
🧍♀️ कौन थीं शांति यादव?
मूल रूप से जौनपुर जिले के सरपतहा थाना क्षेत्र की रहने वाली शांति यादव वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश जेल पुलिस में आरक्षी पद पर चयनित हुई थीं। वर्तमान में वह अयोध्या मंडल कारागार में तैनात थीं और अपनी सहकर्मी रेखा के साथ आवासीय परिसर में एक ही कमरे में रह रही थीं।
📅 क्या हुआ घटना वाले दिन?
शुक्रवार रात को शांति यादव ने अपनी रात्रिकालीन ड्यूटी पूरी की और वापस कमरे में लौटीं। उसी समय उनकी रूम पार्टनर रेखा अगली ड्यूटी पर चली गईं। शनिवार को शांति की ड्यूटी दोपहर 12:30 बजे थी, लेकिन वह समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचीं।
जेल प्रशासन को शक हुआ और उनके सहयोगियों ने करीब 2 बजे उनके कमरे पर दस्तक दी। जब कई बार पुकारने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, तो पीछे से झांककर देखा गया। वहां शांति यादव का शव फंदे से लटकता हुआ नजर आया।
🚨 मौके पर पहुंची पुलिस, दरवाजा था अंदर से बंद
नगर कोतवाल अश्विनी पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतरवाया।
उन्होंने बताया:
“कमरा अंदर से बंद था, जिससे प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही सही कारण स्पष्ट हो पाएगा।”
शव को परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
🧾 कोई शिकायत नहीं, फिर भी सवाल
वरिष्ठ जेल अधीक्षक का कहना है कि शांति यादव ने अब तक किसी भी प्रकार की कोई लिखित या मौखिक शिकायत नहीं की थी, जिससे आत्महत्या के पीछे कारणों को लेकर शंका और बढ़ गई है।
पुलिस ने बताया कि
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कमरे की तलाशी ली गई है।
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मृतका का मोबाइल फोन, डायरी आदि जब्त कर फॉरेंसिक जांच को भेजा गया है।
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सहकर्मियों और परिजनों से पूछताछ की जा रही है।
❓ हत्या या आत्महत्या?
हालांकि, पुलिस इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या मान रही है, परन्तु परिजनों के बयान, मोबाइल रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की धाराएं तय की जाएंगी।
🗣 परिजनों की मांग: उच्चस्तरीय जांच हो
शाम होते-होते परिजन अयोध्या पहुंचे। उन्होंने मौत को संदिग्ध बताते हुए सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की। परिजनों का कहना है कि शांति मानसिक रूप से मजबूत थीं और उन्होंने कभी कोई तनाव नहीं जताया था।
🧩 पिछले मामलों से तुलना
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जेलों में इस प्रकार की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, जहां पुलिसकर्मी ड्यूटी के दबाव, व्यक्तिगत कारण या सिस्टम की खामियों से मानसिक तनाव झेलते हैं।