फरीदाबाद, IBN24x7NEWS | बी.आर. मुराद की रिपोर्ट:
जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के संचार एवं मीडिया तकनीकी विभाग के विद्यार्थियों द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री ‘आशा की किरण’ ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय फिल्म महोत्सव में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त कर विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है। इस सम्मान के रूप में विद्यार्थियों को 5100 रुपये की राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुशील कुमार तोमर ने विभाग और विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि सिनेमा रचनात्मकता का माध्यम है, जो समाज को प्रेरणा देने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं में अद्भुत आत्मबल है और यदि वे राष्ट्रहित में कार्य करें, तो विकसित भारत का सपना 2047 से पहले साकार हो सकता है।
🎥 डॉक्यूमेंट्री ‘आशा की किरण’ की विशेषताएँ:
इस डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन हेमंत शर्मा ने किया, धीरेन सिंह ने संपादन (एडिटिंग), कनिष्का मिश्रा ने स्क्रिप्टिंग और वॉइस ओवर का कार्य किया जबकि विस्तृत गुप्ता ने वीडियोग्राफी की ज़िम्मेदारी संभाली। फिल्म में दिल्ली की एक महिला रिक्शा चालक की संघर्षपूर्ण कहानी को दर्शाया गया है, जो अन्य महिलाओं और लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है।
डायरेक्टर हेमंत शर्मा ने बताया कि तीर्थयात्रा के दौरान इस महिला से हुई मुलाकात के बाद उनकी संघर्ष गाथा को डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, ताकि महिला सशक्तिकरण का संदेश जन-जन तक पहुँचे।
🎓 विश्वविद्यालय की निरंतर सफलता की कड़ी:
डॉक्यूमेंट्री की सफलता के पीछे विभागाध्यक्ष प्रो. पवन सिंह की प्रेरणा और वरिष्ठ प्रशिक्षक दुष्यंत त्यागी, प्रॉडक्शन सहायक पंकज सैनी और अंजू सिंह का मार्गदर्शन भी प्रमुख रहा। एडिटर धीरेन सिंह ने बताया कि यह उनकी टीम की लगातार पांचवीं जीत है।
पूर्व में टीम को इन डॉक्यूमेंट्रीज़ के लिए सम्मान मिल चुका है:
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‘बिजली महादेव मंदिर’ – प्रथम एवं तृतीय पुरस्कार
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‘श्रम सारथी सेवा भारती’ – द्वितीय पुरस्कार
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‘ज्योतिसर : गीता का जन्मस्थल’ – द्वितीय पुरस्कार
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और अब ‘आशा की किरण’ – द्वितीय पुरस्कार